सपने कुछ ऐसे हैं मेरे, जो अपनों से दूर कर देते हैं। मगर अपने भी कुछ ऐसे हैं, जो दूर होकर भी हर पल दिल में दस्तक देते हैं।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 28 February 2016
मेरे सपने
Monday, 22 February 2016
यादें
"कितनी अजीब हैं ये यादें भी, कोई ना बुलाये, फिर भी पास आ जाती हैं। गर ना हो दिल में कुछ, फिर भी एक नया एहसास छोड़ जाती हैं।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 21 February 2016
रब का शुक्रिया
''ना जाने कितने कल को जोड़कर, मैंने इस पल को बनाया। लाख शुक्रिया करूँ उस रब का, जो उसने मुझे हर मुश्किल के काबिल बनाया।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Friday, 19 February 2016
ख्वाहिशों की लहर
जब मन में ख्वाहिशों की लहर उमड़ने लगती है, तब जिन्दगी की हर मुश्किल और भी आसान लगने लगती है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Saturday, 13 February 2016
आज और कल
''हर पल को संभालना चाहता हूं, कल के लिए। आज तो बस सपने दिखा कर चला जाता है।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Wednesday, 10 February 2016
गुमसुम
''वो साथ है मेरे, पर मैं खुद से दूर हूँ ।
जाने क्या इन लम्हों में, भीड़ में होकर भी मैं गुमसुम हूँ।'' -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Thursday, 4 February 2016
उनकी यादें
मीठी हैं उनकी यादें कुछ इस कदर, जब आती है,
गम की कडुवाहट भी मिठास में बदल जाती हैं।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Wednesday, 3 February 2016
जिन्दगी का इशारा
वो मिले ऐसे, जैसे जिन्दगी का नया इशारा। जी रहा था पहले भी मैं, पर अब और भी आसान हो गया जीना हमारा। --धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Tuesday, 2 February 2016
तेरी याद
आसमां में कुछ यूँ घटा छाई, आज दिल को तेरी याद आई।
दो दिल एक हैं, पर जाने क्यों है ये तन्हाई।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।