ये तो बस आगाज है मंजिल का,
अभी तो मेहनत का अंजाम बाकी है..(१)
अब तक तो बिखरा था मैं,
बस अब निखरना बाकी है..(२)
यूँ सराहा जो तूने इस नाचीज को हर कदम पर,
दिल तेरा गुलशन बन बैठा है..(३)
कभी थिरकते थे कदम मेरे,
अरमां जिन्दगी का गाने में..(४)
अब तो मैं हर नज्म गाता,
लोगों के मेहखाने में..(५)
बस इतनी सी आरजू है मेरी तुझसे (जिन्दगी),
मैं गाऊँ तुझे और तू सुने मुझे..(६)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
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