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Sunday, 31 January 2016

तन्हाई

तन्हाई इतना सताती है,
कि हाल ऐ दिल अब बयां नहीं की जाती..(१)

अगर हो तुम ख्यालों में मेरे,
तो सपने भी अपने से लगते हैं..(२)

जाने क्यों दिल तन्हा सा तुम बिन
एक पल दुरी सह नहीं पाता..(३)

दिन तो निकल जाता है,
पर मैं खोया खोया सा रह जाता..(४)

प्रित है तुमसे ऐसी,
जो अब रातों को जगाये..(५)

साथ भरा सफर जिन्दगी का,
जाने क्यों सुनसान नजर आये..(६)

एक लम्हा अगर बीते तुम बिन,
तो वो साल सा लगने लगता है..(७)

तन्हाई में अक्सर दिल,
ग़मज़दा सा रहने लगता है..(८)

है क्यों रीत इश्क की कुछ ऐसी,
रहूँ अगर मैं दूर तुम से,
तो मीत मिलाये ये तन्हाई ..(९)

तन्हाई क्या जाताना चाहती है,
क्यों प्यार का इम्तहान लेना चाहती है ..(१०)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

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