Check out my book on YourQuote. Recently published with YourQuote. click the link: https://www.yourquote.in/dhirendra-bisht-de4h/books/kuch-is-trh-jindgii-ck9

Friday, 28 April 2017

खुश हूँ आज,


खुश हूँ आज,
फिर भी रोना चाहता हूँ!

जीत लूँ दिल दुनिया का,
फिर भी खुद ही से हार जाता हूँ!

भूलना चाहूँ बीते लम्हों को,
दर्द फिर से उनको जिंदगी में दोहराता है!

मुश्किल भले आसान कर लूँ,
सबक जिंदगी में अक्सर जीना सिखाता है!

कल रहूँ ना रहूँ,
बस आज को आज में जीना चाहता हूँ!

खुश हूँ आज,
फिर भी रोना चाहता हूँ!
 -- धीर (धीरेन्द्र)






No comments:

Post a Comment