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Thursday, 27 April 2017

दिल करता है

थक गया चल चल कर रोज़,
आज एक कदम रुकने को जी करता है!

रुक गया, कदम एक बिना सफर तय करे ,
निराशा मन को घेरने लगती है!

ऊब गया रोज़ एक सी जिंदगी जी कर,
आज कुछ अलग करने को दिल करता है!

सोच सोच कर, अक्सर मुकर गया मन,
अब कारवाँ करने को जी करता है!

जी गया मुश्किलों को अब तक,
अब आसान जिंदगी जीने का दिल करता है!

थक गया चल चल कर रोज़,
आज एक कदम रुकने को जी करता है!
-- धीरेन्द्र (धीर)...,






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