''खुद को जितना मजबूत बनाओ,
ये ज़िन्दगी उतना ही कम इम्तिहान लेती है।''
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Saturday, 28 May 2016
एक दिन जिन्दगी का
अगर सफर कर लो एक दिन जिंदगी का मुश्किल भरा,
तो ज़िन्दगी सालों तक खुशियाँ ले आती है मुफ़्त में।
-- ''धीरेंद्र" (धीर)
Friday, 27 May 2016
इंसानियत
पैसों से ज्यादा इंसानियत कमा के रखो!
वक्त बदलने पर पैसा नहीं, इंसानियत काम आती है।
-- "धीरेंद्र'' (धीर)
Monday, 23 May 2016
सफर सुहाना
जिन्दगी कोे ऐसे जाना,
जैसे कोई सफर था सुहाना।
कुछ रास्तों नेे इस कदर पहचाना,
लिखेगा ''धीर'' कोई अफ़साना।
उस कल में मैं यूँ खोया,
गोया सुर कोई, मेरे मन ने संजोया।
वो पागलपन था या जूनून,
ये तय कर पाना मुश्किल था।
बस यही चाहत थी मन।
कुछ कर दिखाऊँ।
हर हद से गुजर।
''ऐ जिन्दगी! बस तुझमें निखार लाऊँ।''
कोई हँसता, हालात पर मेरी,
और कोई देख तरसता, लगन को मेरी।
सपनो ने, दिन को रात
और रातों को दिन बनाया।
पाने की धुन में, हाय!
उस पल ने आँसूओं से मुँह धुलाया।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Wednesday, 18 May 2016
समय और साथ
कभी वक्त था, किसी अजनबी को अपना बनाने का। आज अजनबी अपना हुआ, पर समय नहीं है उनका साथ निभाने को। -- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Thursday, 12 May 2016
फूलों सी, ये "जिन्दगी'
फूलों सी ये जिन्दगी...(१)
हर पल कोशिशों के आगाज में,
खव्हिशों में डूबी जिन्दगी...(२)
मैं मुसाफिर मंजिल का
हर राह, चाह की एक नई किरण...(३)
पल पल नया एहसास है,
हर मुश्किल के बाद एक आस है...(४)
कोई पास तो कोई दूर,
कुछ मगरूर, तो कुछ मजबूर...(५)
दूर है मंजिल अभी,
पर मैं उसके के करीब हूँ...(६)
सीखे हुनर जिंदगी से मैने,
मैं बड़ा खुश नसीब हूँ...(७)
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 9 May 2016
''ख्वाहिशों में डूबी जिन्दगी''
कभी हंस लिया करते थे ,
और आज, रोना ही भूल गए हम।
कदम से कदम मिलाते थे,
जाने क्यों? चलना भूल गए हम।
जिन्दगी को समझना चाहते थे,
फिर कहाँ आ कर उलझ गए हम।
प्यार की बारिश में भीगा करते थे,
फिर क्यों नफरत की आग में झुलस गए हम।
ख्वाहिशों में डूबी थी जिन्दगी,
जाने क्यों भावनाओं में बह गए हम।
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
