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Thursday, 12 May 2016

फूलों सी, ये "जिन्दगी'

हर सफर काँटों भरा,
फूलों सी ये जिन्दगी...(१)

हर पल कोशिशों के आगाज में,
खव्हिशों में डूबी जिन्दगी...(२)

मैं मुसाफिर मंजिल का
हर राह, चाह की एक नई किरण...(३)

पल पल नया एहसास है,
हर मुश्किल के बाद एक आस है...(४)

कोई पास तो कोई दूर,
कुछ मगरूर, तो कुछ मजबूर...(५)

दूर है मंजिल अभी,
पर मैं उसके के करीब हूँ...(६)

सीखे हुनर जिंदगी से मैने,
मैं बड़ा खुश नसीब हूँ...(७)

-- "धीरेन्द्र'' (धीर)



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