अब तक बिखरा था,
अब निखरना बाकी है!
ले भले लाख इम्तिहान ऐ जिंदगी,
अभी खुद को और संवरना बाकी है!
खामियां बहुत निकल चुकी मुझे में,
अब सिर्फ़ ख़ूबियाँ बाकी हैं!
खूब काट ली रात चाँद तारों संग मैंने,
अभी दिन के उजालों से रोशन होना बाकी है!
उम्मीद जो जुड़ी है जिंदगी से अब तक,
अब सिर्फ़ वो मुकाम मिलना बाकी है!
अब तक बिखरा था,
अब निखरना बाकी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)
अब निखरना बाकी है!
ले भले लाख इम्तिहान ऐ जिंदगी,
अभी खुद को और संवरना बाकी है!
खामियां बहुत निकल चुकी मुझे में,
अब सिर्फ़ ख़ूबियाँ बाकी हैं!
खूब काट ली रात चाँद तारों संग मैंने,
अभी दिन के उजालों से रोशन होना बाकी है!
उम्मीद जो जुड़ी है जिंदगी से अब तक,
अब सिर्फ़ वो मुकाम मिलना बाकी है!
अब तक बिखरा था,
अब निखरना बाकी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)

No comments:
Post a Comment