आसान नहीं है जिंदगी का मतलब। समझो तो सुलझी है ये, गर ना समझो तो अकसर उलझती है ये। --''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 28 March 2016
Sunday, 27 March 2016
ख़ुशी जीत पर
ख़ुशी केवल अपनी जीत पर मनाओ, सामने वाले की हार पर नहीं। हर हारने वाला हमेशा अपनी कोशिश का परिचय देता है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 25 March 2016
Saturday, 19 March 2016
जिंदगी में हासिल
आसान नहीं है जिंदगी में कुछ हासिल करना, पर मुश्किल उनके लिए है, जिन्हें खुद पर कम और किस्मत पर ज्यादा भरोसा होता है। -- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 13 March 2016
ढेर सारे गम
जिंदगी में ढेर सारे गम हैं,
मैं हर गम को भूलना चाहता हूँ,
कम्बखत ये ही मुझे याद कर लेते हैं....,
"धीरेन्द्र'' (धीर)
Thursday, 10 March 2016
Wednesday, 9 March 2016
कुछ इस तरह जिन्दगी
अगर जिन्दगी में ना हो..
गम का अंधेरा,
तो खुशियां भी बेस्वाद होती।
अगर चलना ही जीवन होता,
तो रुकना मंजिल नहीं होती।
थमती-दौड़ती, सजती संवरती,
कुछ इस तरह जिन्दगी।
कभी ख़ुशी का स्वाद..
तो कभी बेस्वाद गम।
कोशिशों की कतार लम्बी,
तो सफलता की कम।
दूर खड़ा मैं भी अपनी
कोशिशों की उम्मीद को निहारता।
खुद से जीतता खुद ही से हारता।
कोशिशों का पहर भी
अब रुख बदलता हुआ।
मंजिल भी राहों से ओझल सी।
भीगती पलकों में आज मैं,
नम आँखों से
अपनी आस को निखारता।
छुपता-छिपाता लोगों की बातों
को रोज की कहावतें बनाता।
मन के इरादों को सोच से,
मंजिल का जरिया बनाता।
हर पल मुश्किलों के
समुन्दर में गोते लगाता
कुछ इस तरह जिन्दगी।
गमदीदा हम दोनों (मैं और मन)।
मैं नौनिहाल (मन) को सिखाता,
जिन्दगी फिर से
कोशिशों का दाँव लगाती।
चाह को अपनी मंजिल बनाती।
कभी बिखरती फिर निखरती...,
कुछ इस तरह जिन्दगी।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Tuesday, 8 March 2016
Sunday, 6 March 2016
"तेरी यादों के साथ''
यूँ ही नहीं, बहुत खास थे वो पल ,
अब दूर नहीं मैं तुम से ,
बस कुछ दिन तेरी यादों के साथ हूँ.........,
---- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Saturday, 5 March 2016
सफलता की पहचान
सफलता की एक ही पहचान है, जितनी भी मुश्किलें आसान कर लो, ये दुनिया उतने ही आसान सवाल करती है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
Tuesday, 1 March 2016
उनकी यादें
कितनी अलग हैं उनकी यादें भी, पुरानी होकर भी, हर पल दिल में नया एहसास जगाती है.....!! -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
