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Wednesday, 29 August 2018

खुशी की चाहत में वक़्त कितना कुछ सिखाता है

ये वक़्त भी अजीब है,
खुशी की चाहत में कितना कुछ सिखाता है।
कभी गैर को अपना तो कभी अपनों को गैर बनाता है।(धीर)

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Thursday, 23 August 2018

मेरा किरदार हर रोज़ नया

जिन्दगी वही,
पर मेरा किरदार हर रोज़ नया,
कभी तन्हाई में तो कभी भीड़ में तलाश खुद की। ( धीर)

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खुद ही मैं गुम हूँ

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कुछ नया सिखाने के फिराक में “जिन्दगी”

ऐसा क्या? जो “जिन्दगी”
आज फिर से कुछ नया सिखाने के फिराक में है। (धीर)



स्वार्थ


svaarth-kaa-koii-ruup-nhiin-hotaa-hai

Saturday, 18 August 2018

खुद के साथ बने रहना

खुद के साथ बने रहना,
दुनिया में किसी मुश्किल से कम नही!

भीड़ भले ही अपने सामर्थ्य को जानती हो,
पर संचालन उसका सिर्फ़ किसी एक ही के हाथों में होता है !!(धीर)
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Friday, 17 August 2018

सपनों का टूटना

एक सपने को पूरा करने के लिए,
कई सपनों का टूटना जरूरी है। (धीर)
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Monday, 13 August 2018

Rejection are Based on Present

Rejection are based on present.., Not on your future, just keep trying. The future will be yours. (DHiR)

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Friday, 10 August 2018

बढ़ने दो बातें आज

बढ़ने दो बातें आज,
सुर्ख़ियों में अब रहने को जी सा करता है..!

रूठने दो जमाने को आज,
सिर्फ़ खुद का हो जाने को आज जी करता है..!!(धीर)



Wednesday, 8 August 2018

मज़बूती का भान

जिस खम्भे में ज्यादा भार होता है, ज़रुरी नहीं उसे गिरने का ख़तरा हो,
उसे अपनी मज़बूती का भान भी होता है| (धीर)
जिस खम्भे में ज्यादा भार होता है, ज़रुरी नहीं उसे गिरने का ख़तरा हो,
उसे अपनी मज़बूती का भान भी होता है| (धीर)

Thursday, 2 August 2018

मोहब्बत को ख़ुदा माना

ले डूबा आज उसे ही इश्क,
जिसने मोहब्बत को कभी ख़ुदा माना,
जिन्दगी के मायने मोहब्बत से भले ही जुड़े थे,
सही मायनों में आज नफरत ने ही, इस गैर को अपना माना।(धीर)