Check out my book on YourQuote. Recently published with YourQuote. click the link: https://www.yourquote.in/dhirendra-bisht-de4h/books/kuch-is-trh-jindgii-ck9

Sunday, 31 January 2016

तन्हाई

तन्हाई इतना सताती है,
कि हाल ऐ दिल अब बयां नहीं की जाती..(१)

अगर हो तुम ख्यालों में मेरे,
तो सपने भी अपने से लगते हैं..(२)

जाने क्यों दिल तन्हा सा तुम बिन
एक पल दुरी सह नहीं पाता..(३)

दिन तो निकल जाता है,
पर मैं खोया खोया सा रह जाता..(४)

प्रित है तुमसे ऐसी,
जो अब रातों को जगाये..(५)

साथ भरा सफर जिन्दगी का,
जाने क्यों सुनसान नजर आये..(६)

एक लम्हा अगर बीते तुम बिन,
तो वो साल सा लगने लगता है..(७)

तन्हाई में अक्सर दिल,
ग़मज़दा सा रहने लगता है..(८)

है क्यों रीत इश्क की कुछ ऐसी,
रहूँ अगर मैं दूर तुम से,
तो मीत मिलाये ये तन्हाई ..(९)

तन्हाई क्या जाताना चाहती है,
क्यों प्यार का इम्तहान लेना चाहती है ..(१०)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

Sunday, 24 January 2016

यादें

"कह दो अपनी यादों से, अब से दिल के और करीब ना आये। दिल तो तेरी यादों के साथ धड़क जाता है पर हम दिल के बिना तड़प जाते हैं।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

Tuesday, 12 January 2016

"आगाज ऐ जिन्दगी"

ये तो बस आगाज है मंजिल का,
अभी तो मेहनत का अंजाम बाकी है..(१)

अब तक तो बिखरा था मैं,
बस अब निखरना बाकी है..(२)

यूँ सराहा जो तूने इस नाचीज को हर कदम पर,
दिल तेरा गुलशन बन बैठा है..(३)

कभी थिरकते थे कदम मेरे,
अरमां जिन्दगी का गाने में..(४)

अब तो मैं हर नज्म गाता,
लोगों के मेहखाने में..(५)

बस इतनी सी आरजू है मेरी तुझसे (जिन्दगी),
मैं गाऊँ तुझे और तू सुने मुझे..(६)

-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

Sunday, 10 January 2016

''उनकी चाह में''

ये कल्ब उनका जहाँ हो गया...,
प्यार उनसे बे इन्तहा हो गया..(१)

संभाले अब सम्भलता नहीं...,
उनकी चाह में दिल और भी नादां हो गया..(२)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

अजीब बात

ये भी अजीब बात है, मैं लिखता हूँ और वो मिटाती है। ऐसा क्या मेरे शब्दों में, जो वो मन ही मन मुस्कुराती है। -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।

ऐ दिल

क्या करूँ मैं इस दिल का, जो मानता कम, मनाता ज्यादा है। क्यों सुनूं मैं तेरी ऐ दिल, तू सुनता कम, सुनाता ज्यादा है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।