ना बदल ये सोच कर ऐ जिंदगी,
कि मैंने खुद से हँसना सीख लिया है..!
ना बदल ये सोच कर ऐ जिंदगी,
कि मैंने मुश्किलों में जीना सीख लिया है..!
ना बदल राहें ये सोच कर ऐ जिंदगी,
कि मंज़िल के लिए, मैंने भटकना सीख लिया है..!
ना बदल ये सोच कर ऐ जिंदगी
कि बदलाव को ही मैंने जिंदगी समझ लिया है..!
ना निराश कर ये सोच ऐ जिंदगी,
कि बिखर के तुझ-संग, मैंने निखरना सीख लिया है..!
कि मैंने खुद से हँसना सीख लिया है..!
ना बदल ये सोच कर ऐ जिंदगी,
कि मैंने मुश्किलों में जीना सीख लिया है..!
ना बदल राहें ये सोच कर ऐ जिंदगी,
कि मंज़िल के लिए, मैंने भटकना सीख लिया है..!
ना बदल ये सोच कर ऐ जिंदगी
कि बदलाव को ही मैंने जिंदगी समझ लिया है..!
ना निराश कर ये सोच ऐ जिंदगी,
कि बिखर के तुझ-संग, मैंने निखरना सीख लिया है..!

No comments:
Post a Comment