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Friday, 29 December 2017

मोहब्बत की बात

अगर बात मोहब्बत की है
तो दूरियों में तब्दील होगी ही..!

छोड़ कर देखो नफ़रत का सहारा,
एक दिन तन्हाई भी दिलों से रूबरू होगी..!( धीर)

जिंदगी को लिखने का हुनर

काश मेरे अतीत को कोई पढ़ पाता,
शायद मेरा जिंदगी को लिखने का हुनर आज संवर जाता..!( धीर)


Thursday, 14 December 2017

आज दिल में

सब कुछ खोकर भी
अजीब सी खुशी है आज दिल में..!

हासिल भी कर लिया खुद को भीड़ से
फिर ये कैसी तलाश आज दिल में..!

जिंदगी साथ है आज,
फिर क्यूँ हमसफ़र नही..!

राही और मंजिल एक है
फिर क्यों राह एक नहीं..!

अजीब सिला है दूरियों का जिंदगी में..!
दिलों में अक्सर मोहब्बत बयान कर जाती हैं..!

अगर नज़दीकियाँ चंद लम्हों की ख़ुशी दे,
फिर क्यों फासले में अक्सर कमियाँ नज़र आती हैं..! (धीर)





Wednesday, 13 December 2017

प्यार जिंदगी सँवार देता है

नफरत भले ही किसी का कुछ ना बिगाड़ पाये,
पर प्यार अक्सर लोगों की जिंदगी सँवार देता है।(धीर)


Tuesday, 12 December 2017

Success is Based on Three Things

Success is based on three things,
Conceive the dreams,
Believe on your strength
And Achieve your goals.(DHiR)

Tuesday, 5 December 2017

नफरत की पनाह

मेरे हिस्से में अभी और नफरत बाकी है,
मोहब्बत को दो कदम पीछे रहने दो...!

जब खुद ही सब सही मान बैठे हैं,
चलो दिल को नफरत की पनाह में जीने दो..!{धीर}


THINK

Never think What the people in front
Are thinking about you.
Always think What image you are
Making in your mind for the people in front. {DHiR}




Monday, 4 December 2017

दिल मोहब्बत को दर्द कहता है

खुद प्यार में है
ये दिल आज मुझसे कहता है..!

जब जाना मैंने भी मोहब्बत को
तो दिल इसे सिर्फ दर्द कहता है..!(धीर)



नज़दीकियाँ खुद से

रूठा हूँ आज फिर खुद ही से,
जब आया फुर्सत में करीब अपने..!

अजीब ख्वाहिशें उमड़ने लगी हैं मन में,

मैं खुद में नज़दीकियाँ तय करना चाहता हूँ,
और ये दूर ले जाने की बात करते हैं..!(धीर )



Saturday, 2 December 2017

वास्तविकता

जिंदगी लफ़्ज़ों में भले ही बयां होती हो,
मगर मुकाम अक्सर कारवाँ कर के हासिल होते हैं।

ये तो तय है लोग भीड़ में भले ही तुम्हें भूल जाय,
मगर वो तन्हाई में अक्सर भूले हुए को याद करते हैं। (धीर)



Friday, 1 December 2017

ये चाहत भी अजीब है,

खामोखा समझने लगा हूँ,
आज भीड़ को अपना..!

ये चाहत भी अजीब है,
अब मुझे, मुझ ही से दूर करने की बात करती है..!(धीर)