सब कुछ खोकर भी
अजीब सी खुशी है आज दिल में..!
हासिल भी कर लिया खुद को भीड़ से
फिर ये कैसी तलाश आज दिल में..!
जिंदगी साथ है आज,
फिर क्यूँ हमसफ़र नही..!
राही और मंजिल एक है
फिर क्यों राह एक नहीं..!
अजीब सिला है दूरियों का जिंदगी में..!
दिलों में अक्सर मोहब्बत बयान कर जाती हैं..!
अगर नज़दीकियाँ चंद लम्हों की ख़ुशी दे,
फिर क्यों फासले में अक्सर कमियाँ नज़र आती हैं..! (धीर)
अजीब सी खुशी है आज दिल में..!
हासिल भी कर लिया खुद को भीड़ से
फिर ये कैसी तलाश आज दिल में..!
जिंदगी साथ है आज,
फिर क्यूँ हमसफ़र नही..!
राही और मंजिल एक है
फिर क्यों राह एक नहीं..!
अजीब सिला है दूरियों का जिंदगी में..!
दिलों में अक्सर मोहब्बत बयान कर जाती हैं..!
अगर नज़दीकियाँ चंद लम्हों की ख़ुशी दे,
फिर क्यों फासले में अक्सर कमियाँ नज़र आती हैं..! (धीर)

No comments:
Post a Comment