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Tuesday, 19 June 2018

जिंदगी भीड़ में

जिंदगी भीड़ में ही सही,
अक्सर जिक्र सपनों का ज़हन में आता है!

फ़िक्र आज की हो,
या आने वाले किसी कल की,

पल-पल में,
जिंदगी का ढंग बदल जाता है.!

कुछ खुद से दूर रह लो,
या कुछ करीब मुश्किलों के,

सब्र का हुनर,
जिंदगी को नज़दीकियों तक ले आता है!

सफलता सौ सालों में ही सही,
ग़म उम्र ढलने का
एक दिन मन से निकल जाता है! 

जिंदगी भीड़ में ही सही,
अक्सर जिक्र सपनों का ज़हन में आता है! (धीर)
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