थोड़ा सा पा लिया।
थोड़ा और पा लूँ।
ख्वाहिशों में डूबी, गमों को तरासती
जिन्दगी को गले लगा लिया।
मन की आस को पूरा कर,
अब खुद को भी अपना बना लूँ।
मुश्किलों में लिखे गीत,
मंज़िल की राहों में आज गुनगुना लूँ।
सपनों में देखा जो कल,
अब इस आज को हकीकत बना लूँ।
इबादत की तेरी मालिक से इस कदर मैनें,,
कि तूझे (जिंदगी) अपनी इफ्तिखार बना लूँ।
थोड़ा सा पा लिया, थोड़ा और पा लूँ।
बादिया सी जिन्दगी में, उम्मीद के कुसुम उगा लूँ।
सुन्दर वादियों से,
आज किस्मत फिर से नई बना लूँ।
मन की चाहत को,
कोशिशों से एक मिशाल बना लूँ।
थोड़ा सफर तय कर लिया ,
थोड़ा सा और तय कर लूँ।
बेनाम सी जिन्दगी को,
एक नाम दे कर रौशन कर लूँ।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
सुन्दर
ReplyDeleteShukriya AAdarniy ji
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