प्यार तो फूलों से था,
मगर काँटों ने हमें चुना..(१)
दोस्ती जहाँ से की,
मगर दुश्मन, जमाने ने हमको चुना..(२)
थोड़ा क्या हँस दिये हम,
लोगों ने (हँसी) हिसाब माँगना शुरू कर दिया..(३)
जितना सुलझते आये हम,
जिन्दगी ने उतना ही उलझना शुरू कर दिया..(४)
रश्म (दोस्ती) दिलों जां से निभाते आये,
बदले में आखों को बरसना पड़ा..(५)
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
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