Check out my book on YourQuote. Recently published with YourQuote. click the link: https://www.yourquote.in/dhirendra-bisht-de4h/books/kuch-is-trh-jindgii-ck9

Friday, 30 June 2017

आज

जिंदगी में "आज" की दो अहम भूमिका होती हैं!
एक अतीत को सुधारने की,
तो दूसरी कल को बेहतर बनाने की!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Thursday, 29 June 2017

आईना मोहब्बत का

सँवार लेते हैं
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!

खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!

खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!

आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!

तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,




Wednesday, 28 June 2017

मोह्हबत के फरमान

आँखों में नमी,
पर होठों में मुस्कान,
शायद दिल ने सुना दिए
आज मोह्हबत के फरमान.!
-- धीर..,

Monday, 26 June 2017

समझ

बातें बड़ी नहीं,
इंसान की समझ बड़ी होती है.!

-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Saturday, 24 June 2017

ऐसा क्या आज दिल में

ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!

क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!

ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!

तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!

जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!

ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Friday, 23 June 2017

रिश्ते घर जैसे

रिश्ते भी घर जैसे ही होते हैं,
बनाने में पूरी उमर बीत जाती है,
तोड़ने में पल भी नही लगता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Thursday, 22 June 2017

पहचान

पहचान भी अपने आप में बड़ी बात है,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..., 

Tuesday, 20 June 2017

ये दिल

ये दिल भी अजीब सा है,
मुझ में रहता नहीं,
अब गैरों में जीने की बात करता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Monday, 19 June 2017

मुश्किलें

मुश्किलें हम से उतनी ही बड़ी होती है,
जितनी वो हमारी सोच पर हावी होती हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



Sunday, 18 June 2017

सबक

''अगर मुश्किलों को सबक बना लो जिंदगी में,
फिर तो ऊँचाई भी करीब सी लगती है उड़ने में।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 17 June 2017

बेपरवाह शख्स

''इश्क किया या गुनाह कर बैठे,
बेपरवाह शख्स पर ही बेवजह मोहब्बत लूटा बैठे!''
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Friday, 16 June 2017

तजुर्बा

इंसान पूरी ज़िन्दगी गलत हो सकता है,
पर तजुर्बा अक्सर ज़िन्दगी में सही होता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,

Thursday, 15 June 2017

झिझक इंसान को अंदर से खोखली करती हैं,


          ये आम बात है आज हर कोई एक अच्छी जिंदगी और अपने बेहतर भविष्य के बारे में सोचता है, कुछ सोचते ही रहते हैं और कुछ सोच को पूरा भी करते हैं| कुछ लोगों की सोच बड़ी होते हुये भी, लोग फिर भी पीछे रह जाते हैं, और किस्मत को दोष देते हैं|



          एक बात आज प्राय सामने आती है, "झिझक" जो हमारे अंदर बसी है| कुछ लोगों के दिमाग़ में झिझक का प्रतिबिंब बना होता है, जिससे वह लोगों के बीच जाने में खुद को कमजोर समझते हैं, उनके मन में यही सोच अपना प्रभाव बनाती है, भीड़ में कैसे और लोगों में क्या बातें मुख्य होती हैं| यही से डर शुरू होता है, जो हमारे दिल को अंदर से कमजोर कर सीधा हमारे दिमाग़ पर असर करता है, जिससे कभी-कभार सब कुछ सही होने पर भी हम अपने लक्ष्य हासिल करते करते रह जाते हैं|

          जब सोच हम पर प्रबल होती है, तभी कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, और कुछ रह जाते हैं| इसका मुख्य कारण सोच है, सोच की दिशा अगर सही है, तो हम अपने उद्देश्य को आसानी से हासिल करने में सफल होते हैं , किंतु जब सोच दिशा सही नही होती है ,तब सिवाय मायूसी कुछ हाथ नही आता|

          जिंदगी में कोई मुकाम हासिल करना है तो, सबसे पहले दिमाग़ का संतुलित में होना आवश्यक है, अन्यथा हर संभव कार्य हमारे लिए असंभव भी है|

किसी चीज़ को सोच का हिस्सा उतना ही बनाए
जितना वह हमारे लिए उपयोगी हो..!!
-- धीर (धीरेन्द्र) .....,

Wednesday, 14 June 2017

तलाश

ये तय है जिंदगी में "मुसाफिर"
"तलाश" हमसफ़र  की हो या मंज़िल की,
मिलना सिर्फ़ तुझे एक से है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Tuesday, 13 June 2017

Self-reflection

We are human
Negativeness will be just around us, because it's also a rule of nature!
Negativity is also a part of life,
if we used to use this part to live life,
then our thinking would be bigger one day!
-- Dhirendra (Dhir) S. Bisht


Monday, 12 June 2017

मंज़िल और तकदीर

मंज़िल उन्हें मिलती है,
जो घर से निकलते हैं!

राहों में अक्सर वही भटकते हैं,
जो अपनी तकदीर लिखते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 10 June 2017

सोच

इंसान उम्र से नहीं,
सोच से बड़ा होता है.!
-- धीर ...,

फिर से

ना याद आओ फिर से,
ये दिल फिर से गुस्ताख़ी करता है.!

ना लौट कर आना फिर से,
अब दिल मुझसे रूठने की बात करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



परिस्थिति

परिस्थितियां भले ही मुश्किल हो जीवन में,
पर इनसे पार पाने वाले ही
अक्सर जिंदगी को आसान बनाते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Thursday, 8 June 2017

सोच

ये जरूरी नहीं है,
जैसी सोच हम रखते हैं, वही दुनियाँ भी रखे,
पर ये तय है,
खुद को बदलने वाले ही अक्सर दुनिया की सोच बदलते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Wednesday, 7 June 2017

ऐ दिल

ना कर एहसास लम्हों को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!

ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!

ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!

थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!

तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!

ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

Tuesday, 6 June 2017

सोच

जमाना आपके लिए क्या सोचता है,
ये जानना आपके लिये जरूरी नही है।
आप जमाने के लिये क्या सोच रखते हैं,
ये अपने आप में जानना जरूरी है।
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Sunday, 4 June 2017

ऊँचाई

कुछ चीजें जिंदगी में आसान नहीं होती,
गर सोच को खुद से जीत लो,
तो ऊँचाई को पैरों से नीचे होने में देर नही लगती है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 3 June 2017

अतीत के सिलसिले

सिलसिले कुछ ऐसे हैं अतीत के,
मैं आज को जीना चाहता हूँ,
और ये भी कल की बात करते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Friday, 2 June 2017

इंतजार

ये इंतजार भी अजीब सा होता है,
लोग अपने आज को भूल जाते हैं !
कल के लिए!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


नज़रअंदाज़

नज़रों में सिर्फ़ उतना ही रहो,
जितना कोई आपको नज़रअंदाज़ ना कर सके!
 -- धीर (धीरेन्द्र)..,

Thursday, 1 June 2017

तख्त-ताज

राज तो दिलों पर मोहब्बत का होता है,
बे वजह लोग नफ़रत को तख्त-ताज समझ लेते हैं!

दिलों में आगाज़ तो सिर्फ़ मोहब्बत का होता है,
बे वजह लोग नफ़रत को अंजाम समझ लेते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,