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Thursday, 15 June 2017

झिझक इंसान को अंदर से खोखली करती हैं,


          ये आम बात है आज हर कोई एक अच्छी जिंदगी और अपने बेहतर भविष्य के बारे में सोचता है, कुछ सोचते ही रहते हैं और कुछ सोच को पूरा भी करते हैं| कुछ लोगों की सोच बड़ी होते हुये भी, लोग फिर भी पीछे रह जाते हैं, और किस्मत को दोष देते हैं|



          एक बात आज प्राय सामने आती है, "झिझक" जो हमारे अंदर बसी है| कुछ लोगों के दिमाग़ में झिझक का प्रतिबिंब बना होता है, जिससे वह लोगों के बीच जाने में खुद को कमजोर समझते हैं, उनके मन में यही सोच अपना प्रभाव बनाती है, भीड़ में कैसे और लोगों में क्या बातें मुख्य होती हैं| यही से डर शुरू होता है, जो हमारे दिल को अंदर से कमजोर कर सीधा हमारे दिमाग़ पर असर करता है, जिससे कभी-कभार सब कुछ सही होने पर भी हम अपने लक्ष्य हासिल करते करते रह जाते हैं|

          जब सोच हम पर प्रबल होती है, तभी कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, और कुछ रह जाते हैं| इसका मुख्य कारण सोच है, सोच की दिशा अगर सही है, तो हम अपने उद्देश्य को आसानी से हासिल करने में सफल होते हैं , किंतु जब सोच दिशा सही नही होती है ,तब सिवाय मायूसी कुछ हाथ नही आता|

          जिंदगी में कोई मुकाम हासिल करना है तो, सबसे पहले दिमाग़ का संतुलित में होना आवश्यक है, अन्यथा हर संभव कार्य हमारे लिए असंभव भी है|

किसी चीज़ को सोच का हिस्सा उतना ही बनाए
जितना वह हमारे लिए उपयोगी हो..!!
-- धीर (धीरेन्द्र) .....,

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