ना दिन का पता
ना रातों की खबर.!
ना संगी है न साथी,
सुनसान सी है ये जिंदगी की डगर.!
रात का पहर अक्सर दिन के कारवें की बात करता है,
तन्हाई में मन बात बात पर खुद से उलझता है.!
आँखों में नींद कम,
आज ख़्वाब ज़्यादा हैं.!
खूब खोया है खुद को मुश्किलों में,
आज सिर्फ़ जिंदगी से पाने का इरादा है.!
-- धीर ..,
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