ख्वाहिशें अक्सर जीत की थी जिंदगी में ..,
क्यों आज मन खुद से ही हार गया..!
अतीत उम्मीदों भरा था मेरा..,
क्यों आज मन खुद से ही हार गया..!
अतीत उम्मीदों भरा था मेरा..,
फिर क्यों आज मुझे नकार गया...!
क्या इतना ही फर्क है?
अतीत और आज में..!
जो सुबह अपनी रोशन हुआ करती थी...,
उन्ही में आज एक अजीब सी धुन्ध है..!
अतीत और आज में..!
जो सुबह अपनी रोशन हुआ करती थी...,
उन्ही में आज एक अजीब सी धुन्ध है..!
जिसमें अक्सर पाने की चाह हुआ करती थी,
उसी को आज खोने का मन है..!
जिनसे अतीत में ख़ुशियाँ थी...,
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