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Wednesday, 1 November 2017

फर्क अतीत और आज में

ख्वाहिशें अक्सर जीत की थी जिंदगी में ..,
क्यों आज मन खुद से ही हार गया..!

अतीत उम्मीदों भरा था मेरा..,
फिर क्यों आज मुझे नकार गया...!

क्या इतना ही फर्क है?
अतीत और आज में..!

जो सुबह अपनी रोशन हुआ करती थी...,
उन्ही में आज एक अजीब सी धुन्ध है..!

जिसमें अक्सर पाने की चाह हुआ करती थी,
उसी को आज खोने का मन है..!

जिनसे अतीत में ख़ुशियाँ थी...,
उन्ही से आज दिल में गम है..!{धीर}
-- धीरेन्द्र {धीर}



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