खामोश हूँ आज
फिर ये मन में शोर कैसा...,
तन्हाई साथ है मेरे,
फिर ये भीड़ में दोस्ती का होड़ कैसा...,
अगर दर्द जिंदगी है
तो दिल को ज़ख़्मों से हमदर्दी का भाव कैसा...,
अजीब लोग हैं आज भीड़ में
खुद दर्द देकर, खुद ही हाल पूछ लेते हैं...,
नक़ाब मोहब्बत का पहनकर
दिलों का रुख़ नफरत की ओर कर लेते हैं...,(धीर)
फिर ये मन में शोर कैसा...,
तन्हाई साथ है मेरे,
फिर ये भीड़ में दोस्ती का होड़ कैसा...,
अगर दर्द जिंदगी है
तो दिल को ज़ख़्मों से हमदर्दी का भाव कैसा...,
अजीब लोग हैं आज भीड़ में
खुद दर्द देकर, खुद ही हाल पूछ लेते हैं...,
नक़ाब मोहब्बत का पहनकर
दिलों का रुख़ नफरत की ओर कर लेते हैं...,(धीर)

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