ऐसे ख्वाब क्यों देख लिए जिंदगी ने
जो संग मुश्किलों के बिखरने लगे हैं..!
ख़यालों के शहर तो कई बना लिए थे,
पर जाने क्यों बात-बात यूँ ही बिखरने लगे..! (धीर)


जो संग मुश्किलों के बिखरने लगे हैं..!
ख़यालों के शहर तो कई बना लिए थे,
पर जाने क्यों बात-बात यूँ ही बिखरने लगे..! (धीर)

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