आज भी जा रहा है सिर्फ़ ये सोच कर,
कि कल मुझसे बेहतर आएगा..!
क्यूँ ना समेट लूँ, इन बिखरे लम्हों को आज खुद में,
शायद यही कल ज़्यादा करीब आये..!(धीर)

कि कल मुझसे बेहतर आएगा..!
क्यूँ ना समेट लूँ, इन बिखरे लम्हों को आज खुद में,
शायद यही कल ज़्यादा करीब आये..!(धीर)

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