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Tuesday, 6 February 2018

बेहतर कल

आज भी जा रहा है सिर्फ़ ये सोच कर,
कि कल मुझसे बेहतर आएगा..!

क्यूँ ना समेट लूँ, इन बिखरे लम्हों को आज खुद में,
शायद यही कल ज़्यादा करीब आये..!(धीर)
आज भी जा रहा है सिर्फ़ ये सोच कर,
कि कल मुझसे बेहतर आएगा..!

क्यूँ ना समेट लूँ, इन बिखरे लम्हों को आज खुद में,
शायद यही कल ज़्यादा करीब आये..!(धीर)












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