कभी खुद को खोकर तो देखो,
शायद पाने का हुनर आ जाए..!!
मुश्किलों को ज़रा करीब से तो देखो,
शायद ज़िदगी आसान हो जाए..!!
कभी मुठ्ठी बाँध कर भी देखो,
शायद तकदीर का दरवाज़ा खुल जाए..!!
भीड़ में खुद का हौसला बन कर चलो,
शायद भीड़ आपका हौसला बन जाए..!!
जमीन में लकीर खींच कर तो देखो,
शायद आसमान का कद छोटा पड़ जाए..!!
कभी खुद को खोकर तो देखो,
शायद पाने का हुनर आ जाए..!!(धीर)
शायद पाने का हुनर आ जाए..!!
मुश्किलों को ज़रा करीब से तो देखो,
शायद ज़िदगी आसान हो जाए..!!
कभी मुठ्ठी बाँध कर भी देखो,
शायद तकदीर का दरवाज़ा खुल जाए..!!
भीड़ में खुद का हौसला बन कर चलो,
शायद भीड़ आपका हौसला बन जाए..!!
जमीन में लकीर खींच कर तो देखो,
शायद आसमान का कद छोटा पड़ जाए..!!
शायद पाने का हुनर आ जाए..!!(धीर)
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