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Monday, 24 April 2017

परख


परख सोच में नहीं इरादों मे रख मुसाफिर,
अक्सर कोशिशें तभी नाकाम होती हैं
जब मंज़िल सिर्फ सोच तक सीमित होती हैं।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Sunday, 23 April 2017

वक्त

वक्त कभी गलत नहीं होता,
बस उसे समझने की नीति
कभी कभी ग़लत हो जाती है।
-- धीर (धीरेन्द्र)

Saturday, 22 April 2017

मोहब्बत का सिलसिला

अजीब सिलसिला है ये मोहब्बत का,
किसी के रूठने का जवाब नही, तो किसी के मनाने का हिसाब नही!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Friday, 21 April 2017

कमियाँ

कमियाँ मुझ मैं हैं,
फिर भी अपनी कमियाँ छोड़ जाते हैं,
मुझ में कमियाँ निकाल कर लोग!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Wednesday, 19 April 2017

कोशिश एक पल खुद को हँसाने की

वजह मिलती कहाँ आज के बख़्त में मुस्कुराने की,
दिन भले ही मुश्किलों से भरा हो,
अक्सर कोशिश करता हूँ,
एक पल खुद को हँसाने की!!
-- धीर 

Tuesday, 18 April 2017

"मुश्किलें हमें बदल देती हैं"

हमारी उपलब्धियां हमें कम,
राह की मुश्किलें हमें ज्यादा बदल देती हैं!

-- धीर..,

"जी लूं हर दिन को नये सिरे से मैं"

जी लूं  हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी रात जिंदगी मे बाकि हैं!

कुछ हिसाब माँग लिए आज जिंदगी से,
कुछ और करने अभी बाकि हैं!

जिये हज़ार गम जिंदगी मे,
बस अब खुशियाँ ही बाकि हैं!

भीग लिए नफरत की बारिश मे,
छाँव प्यार की अभी बाकि है!

लिख लिए सफ़र के गीत,
अब ख़ुशियों मे गुनगुनाने बाकि है!

जी लूँ हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी जिंदगी मे रात बाकि हैं!
-- Dhirendra S. Bisht (Dhir)





Saturday, 15 April 2017

"छोटे-छोटे सपने"

जिंदगी में सपने भले ही छोटे-छोटे देखे,
अक्सर हर सपने के लिए बड़ी कोशिश की है मैने!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Thursday, 13 April 2017

हसरतें आज मन में

हसरतें कई हैं आज मन में,
पर तुमसे बढ़कर कोई नही!

जी लूँ जिंदगी निहार के तुम को,
तेरे ख़्वाब से बढ़कर कोई नही!

सवार लूँ खुद को आज तुमसे,
तेरे एहसास से बढ़कर कोई नही!

जो पल बीत गये संग तेरे,
इन लम्हों मे वो बात नही!

हसरतें कई हैं आज मन में,
पर तुमसे बढ़कर कोई नही!
-- धीरेन्द्र (धीर) ..,




Wednesday, 12 April 2017

बेपनाह इश्क़

क्यों ना करूँ बेपनाह इश्क़ उनसे,
मैं मोहब्बत उन से करती हूँ
और वो मेरी मोहब्बत से इश्क़ करते हैं!
-- धीरेन्द्र (धीर) ..,


Sunday, 9 April 2017

जीना हर कोई नहीं सिखाता

जीता हर कोई है,
पर जीना हर कोई नहीं सिखाता..!
-- धीरेन्द्र "धीर"
 

खूबियाँ

गर कमियां अपनी ही दूर कर ली जाय,
लोगों में खामियाँ कम खूबियाँ ज्यादा नजर आने लगती हैं.!
-- "धीर"

Friday, 7 April 2017

एहसास गिर कर संभलने का

एहसास है मुझे गिर कर संभलने का,
अगर कोई छोड़ भी दे परवाह मेरी,
पर मुश्किलों से जंग, जीत तक बरकरार रहेगी मेरी|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,


वक्त बदलता है मेरे नये अनुभव के साथ

कितना अजीब है ये वक्त,
खुद बदलता है मेरे नये अनुभव के साथ..!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Thursday, 6 April 2017

सोच

सोच हर इंसान की सही है,
अगर उसे समझने वाला सही हो.!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Tuesday, 4 April 2017

बातें

कभी कभी बातों से इंसान नहीं,
बातें इंसान की ज़िंदगी बदल देती है..!
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,


एहसास

एहसास दिलों में कम आज,
लोग इसे शब्दों मे ज्यादा पिरोना जानते हैं..!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Monday, 3 April 2017

दुआ

ऐ जिंदगी ना कोई और दुआ तुझ से,
बना काबिल इस कदर मुझे,
सिर्फ़ कोशिशों से जी लूँ तुझे|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,

Sunday, 2 April 2017

ज़िंदगी की बागडोर

ज़िंदगी की बागडोर जब से संभाली है,
तब से आज तक लोगों की कसर का जवाब नही|

कोई हौसले बढ़ाने तो कोई गिरने मे,
आज के जमाने का कोई हिसाब नही है|

असर हम पर भी इन बातों का कभी हुआ नहीं,
क्योंकि सपनों ने पहले से अपना जो बनना रखा है|

कौन नही मानता है?
लोग अनुभवी नही हैं आज समय मे |

बस ये तर्क और कुतर्क
कभी-कभार समझने वालों से उनकी समझ का इम्तिहान ले लेते  हैं|

कोशिश तो खूब की आज के जमाने मे,
अक्सर भागीदारी उनकी रही है जिंदगी मे,
बिना परख जाने हम मे कमियाँ दिखाने की|

शिकायत हुई नहीं थी कल तलक किसी को जमाने मे,
फिर क्यूँ हुई "धीर" के आज को बेहतर बनाने मे|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,