Tuesday, 25 April 2017
Monday, 24 April 2017
Sunday, 23 April 2017
Saturday, 22 April 2017
Friday, 21 April 2017
Wednesday, 19 April 2017
Tuesday, 18 April 2017
"जी लूं हर दिन को नये सिरे से मैं"
जी लूं हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी रात जिंदगी मे बाकि हैं!
कुछ हिसाब माँग लिए आज जिंदगी से,
कुछ और करने अभी बाकि हैं!
जिये हज़ार गम जिंदगी मे,
बस अब खुशियाँ ही बाकि हैं!
भीग लिए नफरत की बारिश मे,
छाँव प्यार की अभी बाकि है!
लिख लिए सफ़र के गीत,
अब ख़ुशियों मे गुनगुनाने बाकि है!
जी लूँ हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी जिंदगी मे रात बाकि हैं!
-- Dhirendra S. Bisht (Dhir)
अभी रात जिंदगी मे बाकि हैं!
कुछ हिसाब माँग लिए आज जिंदगी से,
कुछ और करने अभी बाकि हैं!
जिये हज़ार गम जिंदगी मे,
बस अब खुशियाँ ही बाकि हैं!
भीग लिए नफरत की बारिश मे,
छाँव प्यार की अभी बाकि है!
लिख लिए सफ़र के गीत,
अब ख़ुशियों मे गुनगुनाने बाकि है!
जी लूँ हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी जिंदगी मे रात बाकि हैं!
-- Dhirendra S. Bisht (Dhir)
Saturday, 15 April 2017
"छोटे-छोटे सपने"
जिंदगी में सपने भले ही छोटे-छोटे देखे,
अक्सर हर सपने के लिए बड़ी कोशिश की है मैने!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
अक्सर हर सपने के लिए बड़ी कोशिश की है मैने!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
Thursday, 13 April 2017
Wednesday, 12 April 2017
Sunday, 9 April 2017
खूबियाँ
गर कमियां अपनी ही दूर कर ली जाय,
लोगों में खामियाँ कम खूबियाँ ज्यादा नजर आने लगती हैं.!
-- "धीर"
लोगों में खामियाँ कम खूबियाँ ज्यादा नजर आने लगती हैं.!
-- "धीर"
Friday, 7 April 2017
एहसास गिर कर संभलने का
एहसास है मुझे गिर कर संभलने का,
अगर कोई छोड़ भी दे परवाह मेरी,
पर मुश्किलों से जंग, जीत तक बरकरार रहेगी मेरी|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,
अगर कोई छोड़ भी दे परवाह मेरी,
पर मुश्किलों से जंग, जीत तक बरकरार रहेगी मेरी|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,
Thursday, 6 April 2017
Monday, 3 April 2017
Sunday, 2 April 2017
ज़िंदगी की बागडोर
ज़िंदगी की बागडोर जब से संभाली है,
तब से आज तक लोगों की कसर का जवाब नही|
कोई हौसले बढ़ाने तो कोई गिरने मे,
आज के जमाने का कोई हिसाब नही है|
असर हम पर भी इन बातों का कभी हुआ नहीं,
क्योंकि सपनों ने पहले से अपना जो बनना रखा है|
कौन नही मानता है?
लोग अनुभवी नही हैं आज समय मे |
बस ये तर्क और कुतर्क
कभी-कभार समझने वालों से उनकी समझ का इम्तिहान ले लेते हैं|
कोशिश तो खूब की आज के जमाने मे,
अक्सर भागीदारी उनकी रही है जिंदगी मे,
बिना परख जाने हम मे कमियाँ दिखाने की|
शिकायत हुई नहीं थी कल तलक किसी को जमाने मे,
फिर क्यूँ हुई "धीर" के आज को बेहतर बनाने मे|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
तब से आज तक लोगों की कसर का जवाब नही|
कोई हौसले बढ़ाने तो कोई गिरने मे,
आज के जमाने का कोई हिसाब नही है|
असर हम पर भी इन बातों का कभी हुआ नहीं,
क्योंकि सपनों ने पहले से अपना जो बनना रखा है|
कौन नही मानता है?
लोग अनुभवी नही हैं आज समय मे |
बस ये तर्क और कुतर्क
कभी-कभार समझने वालों से उनकी समझ का इम्तिहान ले लेते हैं|
कोशिश तो खूब की आज के जमाने मे,
अक्सर भागीदारी उनकी रही है जिंदगी मे,
बिना परख जाने हम मे कमियाँ दिखाने की|
शिकायत हुई नहीं थी कल तलक किसी को जमाने मे,
फिर क्यूँ हुई "धीर" के आज को बेहतर बनाने मे|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
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