Wednesday, 21 December 2016
थम जाती हैं मुश्किलें
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,
मुश्किलों में जीना बाकि है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
वक्त पर साथ निभाते है।
वैसे भीड़ में देखता उन्हें भी हूँ, जो वक्त पर बिन कहे साथ निभाते है।
-- धीर
कोशिशों से उम्मीदें
जिंदगी से कम पर कोशिशों से उम्मीदें और ज्यादा है..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
दुनिया का उसूल
जिस किसी को भी करीब से जानने लगोगे तुम,
कम्बखत वही तुम्हारी समझ का लाख इम्तहान लेगा..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)__,
Monday, 12 December 2016
आसुँओं कीमत
ए मनचले आशिक़
इतने रंग भी ना बदल ए मनचले आशिक,
कही इन रंगों में,
मैं तेरा असल रंग ही ना भूल जाऊं..!!
-- "धीर"
Tuesday, 6 December 2016
लिखना
इतना आसान भी नहीं है लिखना,
खुद को पहले कलम की स्याही में मिलाना पड़ता है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
Friday, 2 December 2016
ऐ जिन्दगी
अब और निखरना बाकी है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
अपना सफ़र
उन्हें देख कर,
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,
जिन्दगी का इतिहास
जो लोग अपनी सोच को, इरादों से बड़ी रखते हैं...!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
Wednesday, 9 November 2016
चाहत
दुनिया भले ही ख्यालों में हो, पर मैं अपनी हकीकत से रूबरू हूँ।
ये पल मुश्किलों का ही सही, पर मैं अपनी चाहत के बहुत करीब हूँ।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 31 October 2016
Tuesday, 25 October 2016
बीते लम्हों
भुला नहीं आज भी बीते लम्हों को,
बस थोड़ा व्यस्त हूँ कल को बनाने में
- "धीरेन्द्र" (धीर)
Sunday, 9 October 2016
Wednesday, 5 October 2016
अफ़साना
जो मन कह रहा, अब वही सुन रहा हूँ।
बेसुध हूँ इस कदर,
जैसे मैं जिन्दगी का कोई अफ़साना लिख रहा हूँ।
-- ''धीर"
Wednesday, 28 September 2016
Monday, 26 September 2016
Wednesday, 7 September 2016
''Thinking and intentions''
Make a difficult job easier in life, then keep thinking always great intentions.
-- Dhirendra S. Bisht ( Dhir)
Monday, 29 August 2016
Tuesday, 23 August 2016
धुन
Wednesday, 10 August 2016
Tuesday, 9 August 2016
Wednesday, 22 June 2016
''साथ जिंदगी भर का"
''किसी का साथ जिंदगी भर का हो ना हो,
पर यादें अकसर जिंदगी भर का साथ निभाती हैं।"
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 20 June 2016
Saturday, 11 June 2016
"मुश्किलों का साथ''
कोई साथ हो ना हो, पर मुश्किलें साथ हैं।
"साथ लोगों को अक्सर कमजोर बनाता है,
पर मुश्किलें हर कदम पर हौसला बढ़ाती है।''
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 5 June 2016
Saturday, 28 May 2016
एक दिन जिन्दगी का
अगर सफर कर लो एक दिन जिंदगी का मुश्किल भरा,
तो ज़िन्दगी सालों तक खुशियाँ ले आती है मुफ़्त में।
-- ''धीरेंद्र" (धीर)
Friday, 27 May 2016
इंसानियत
पैसों से ज्यादा इंसानियत कमा के रखो!
वक्त बदलने पर पैसा नहीं, इंसानियत काम आती है।
-- "धीरेंद्र'' (धीर)
Monday, 23 May 2016
सफर सुहाना
जिन्दगी कोे ऐसे जाना,
जैसे कोई सफर था सुहाना।
कुछ रास्तों नेे इस कदर पहचाना,
लिखेगा ''धीर'' कोई अफ़साना।
उस कल में मैं यूँ खोया,
गोया सुर कोई, मेरे मन ने संजोया।
वो पागलपन था या जूनून,
ये तय कर पाना मुश्किल था।
बस यही चाहत थी मन।
कुछ कर दिखाऊँ।
हर हद से गुजर।
''ऐ जिन्दगी! बस तुझमें निखार लाऊँ।''
कोई हँसता, हालात पर मेरी,
और कोई देख तरसता, लगन को मेरी।
सपनो ने, दिन को रात
और रातों को दिन बनाया।
पाने की धुन में, हाय!
उस पल ने आँसूओं से मुँह धुलाया।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Wednesday, 18 May 2016
समय और साथ
कभी वक्त था, किसी अजनबी को अपना बनाने का। आज अजनबी अपना हुआ, पर समय नहीं है उनका साथ निभाने को। -- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Thursday, 12 May 2016
फूलों सी, ये "जिन्दगी'
फूलों सी ये जिन्दगी...(१)
हर पल कोशिशों के आगाज में,
खव्हिशों में डूबी जिन्दगी...(२)
मैं मुसाफिर मंजिल का
हर राह, चाह की एक नई किरण...(३)
पल पल नया एहसास है,
हर मुश्किल के बाद एक आस है...(४)
कोई पास तो कोई दूर,
कुछ मगरूर, तो कुछ मजबूर...(५)
दूर है मंजिल अभी,
पर मैं उसके के करीब हूँ...(६)
सीखे हुनर जिंदगी से मैने,
मैं बड़ा खुश नसीब हूँ...(७)
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 9 May 2016
''ख्वाहिशों में डूबी जिन्दगी''
कभी हंस लिया करते थे ,
और आज, रोना ही भूल गए हम।
कदम से कदम मिलाते थे,
जाने क्यों? चलना भूल गए हम।
जिन्दगी को समझना चाहते थे,
फिर कहाँ आ कर उलझ गए हम।
प्यार की बारिश में भीगा करते थे,
फिर क्यों नफरत की आग में झुलस गए हम।
ख्वाहिशों में डूबी थी जिन्दगी,
जाने क्यों भावनाओं में बह गए हम।
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 6 May 2016
Tuesday, 26 April 2016
''कुछ इस तरह जिन्दगी''
प्यार तो फूलों से था,
मगर काँटों ने हमें चुना..(१)
दोस्ती जहाँ से की,
मगर दुश्मन, जमाने ने हमको चुना..(२)
थोड़ा क्या हँस दिये हम,
लोगों ने (हँसी) हिसाब माँगना शुरू कर दिया..(३)
जितना सुलझते आये हम,
जिन्दगी ने उतना ही उलझना शुरू कर दिया..(४)
रश्म (दोस्ती) दिलों जां से निभाते आये,
बदले में आखों को बरसना पड़ा..(५)
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 24 April 2016
खुद से जीतता, हारता
खुद ही से जीतता,
खुद ही से हारता।
मुश्किलों में मन,
मेरी उम्मीद को निहारता...
जाने आज का भी क्या इरादा है,
कोशिशों की कतार इस कदर कम
तो बुलंदियों को पाने की ज्यादा।
मुश्किलें भी हर पल
कितना कुछ जताती हैं।
आज बिखरना तो
कल मुझमें निखार लाती।
वक्त पर तो मेरा जोर नहीं,
बस खुद पर भरोसा है।
खुद ही से रूठता, खुद को मनाता।
गमजदा ये मन , जाने कितने अरमान सजाता।
आज को देखूँ तो,
अतीत याद आता है।
अतीत ही अक्सर मुझे बुंलदियों तक ले जाता है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 1 April 2016
हवा का झोंका
तूफान तो ना था वो...
शायद हवा का झोंका था।
जिसे जिन्दगी की डोर (प्यार)
समझ बैठा था।
शायद वो मेरे मन का धोखा था।
मंजिल का जरिया,
जिसे समझ बैठा था।
वो जिन्दगी का सबसे
उदासीन तोहफा था।
दिल तो ना टूटा,
पर मेरे अरमान जरूर टूटे।
बेपरवाह जज़्बात के आसूँ,
नम आँखों से फूटे।
मन में कभी हलचल करने वाला शहर,
अब वीरान सा लगने लगा।
धड़कनें शोरगुल शहर में खोकर,
एक नई दुनिया खोजने लगी।
जाने वो पल क्यों ऐसा,
कुछ अनसुलझी पहेली जैसा।
जिसे मैं उस रोज सुलझाता,
वो सुलझती और मैं उलझ जाता।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 28 March 2016
जिंदगी चार दिन की....
आसान नहीं है जिंदगी का मतलब। समझो तो सुलझी है ये, गर ना समझो तो अकसर उलझती है ये। --''धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 27 March 2016
ख़ुशी जीत पर
ख़ुशी केवल अपनी जीत पर मनाओ, सामने वाले की हार पर नहीं। हर हारने वाला हमेशा अपनी कोशिश का परिचय देता है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 25 March 2016
Saturday, 19 March 2016
जिंदगी में हासिल
आसान नहीं है जिंदगी में कुछ हासिल करना, पर मुश्किल उनके लिए है, जिन्हें खुद पर कम और किस्मत पर ज्यादा भरोसा होता है। -- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 13 March 2016
ढेर सारे गम
जिंदगी में ढेर सारे गम हैं,
मैं हर गम को भूलना चाहता हूँ,
कम्बखत ये ही मुझे याद कर लेते हैं....,
"धीरेन्द्र'' (धीर)
Thursday, 10 March 2016
Wednesday, 9 March 2016
कुछ इस तरह जिन्दगी
अगर जिन्दगी में ना हो..
गम का अंधेरा,
तो खुशियां भी बेस्वाद होती।
अगर चलना ही जीवन होता,
तो रुकना मंजिल नहीं होती।
थमती-दौड़ती, सजती संवरती,
कुछ इस तरह जिन्दगी।
कभी ख़ुशी का स्वाद..
तो कभी बेस्वाद गम।
कोशिशों की कतार लम्बी,
तो सफलता की कम।
दूर खड़ा मैं भी अपनी
कोशिशों की उम्मीद को निहारता।
खुद से जीतता खुद ही से हारता।
कोशिशों का पहर भी
अब रुख बदलता हुआ।
मंजिल भी राहों से ओझल सी।
भीगती पलकों में आज मैं,
नम आँखों से
अपनी आस को निखारता।
छुपता-छिपाता लोगों की बातों
को रोज की कहावतें बनाता।
मन के इरादों को सोच से,
मंजिल का जरिया बनाता।
हर पल मुश्किलों के
समुन्दर में गोते लगाता
कुछ इस तरह जिन्दगी।
गमदीदा हम दोनों (मैं और मन)।
मैं नौनिहाल (मन) को सिखाता,
जिन्दगी फिर से
कोशिशों का दाँव लगाती।
चाह को अपनी मंजिल बनाती।
कभी बिखरती फिर निखरती...,
कुछ इस तरह जिन्दगी।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Tuesday, 8 March 2016
Sunday, 6 March 2016
"तेरी यादों के साथ''
यूँ ही नहीं, बहुत खास थे वो पल ,
अब दूर नहीं मैं तुम से ,
बस कुछ दिन तेरी यादों के साथ हूँ.........,
---- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Saturday, 5 March 2016
सफलता की पहचान
सफलता की एक ही पहचान है, जितनी भी मुश्किलें आसान कर लो, ये दुनिया उतने ही आसान सवाल करती है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
Tuesday, 1 March 2016
उनकी यादें
कितनी अलग हैं उनकी यादें भी, पुरानी होकर भी, हर पल दिल में नया एहसास जगाती है.....!! -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 28 February 2016
मेरे सपने
सपने कुछ ऐसे हैं मेरे, जो अपनों से दूर कर देते हैं। मगर अपने भी कुछ ऐसे हैं, जो दूर होकर भी हर पल दिल में दस्तक देते हैं।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Monday, 22 February 2016
यादें
"कितनी अजीब हैं ये यादें भी, कोई ना बुलाये, फिर भी पास आ जाती हैं। गर ना हो दिल में कुछ, फिर भी एक नया एहसास छोड़ जाती हैं।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 21 February 2016
रब का शुक्रिया
''ना जाने कितने कल को जोड़कर, मैंने इस पल को बनाया। लाख शुक्रिया करूँ उस रब का, जो उसने मुझे हर मुश्किल के काबिल बनाया।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Friday, 19 February 2016
ख्वाहिशों की लहर
जब मन में ख्वाहिशों की लहर उमड़ने लगती है, तब जिन्दगी की हर मुश्किल और भी आसान लगने लगती है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Saturday, 13 February 2016
आज और कल
''हर पल को संभालना चाहता हूं, कल के लिए। आज तो बस सपने दिखा कर चला जाता है।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Wednesday, 10 February 2016
गुमसुम
''वो साथ है मेरे, पर मैं खुद से दूर हूँ ।
जाने क्या इन लम्हों में, भीड़ में होकर भी मैं गुमसुम हूँ।'' -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Thursday, 4 February 2016
उनकी यादें
मीठी हैं उनकी यादें कुछ इस कदर, जब आती है,
गम की कडुवाहट भी मिठास में बदल जाती हैं।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Wednesday, 3 February 2016
जिन्दगी का इशारा
वो मिले ऐसे, जैसे जिन्दगी का नया इशारा। जी रहा था पहले भी मैं, पर अब और भी आसान हो गया जीना हमारा। --धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Tuesday, 2 February 2016
तेरी याद
आसमां में कुछ यूँ घटा छाई, आज दिल को तेरी याद आई।
दो दिल एक हैं, पर जाने क्यों है ये तन्हाई।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 31 January 2016
तन्हाई
तन्हाई इतना सताती है,
कि हाल ऐ दिल अब बयां नहीं की जाती..(१)
अगर हो तुम ख्यालों में मेरे,
तो सपने भी अपने से लगते हैं..(२)
जाने क्यों दिल तन्हा सा तुम बिन
एक पल दुरी सह नहीं पाता..(३)
दिन तो निकल जाता है,
पर मैं खोया खोया सा रह जाता..(४)
प्रित है तुमसे ऐसी,
जो अब रातों को जगाये..(५)
साथ भरा सफर जिन्दगी का,
जाने क्यों सुनसान नजर आये..(६)
एक लम्हा अगर बीते तुम बिन,
तो वो साल सा लगने लगता है..(७)
तन्हाई में अक्सर दिल,
ग़मज़दा सा रहने लगता है..(८)
है क्यों रीत इश्क की कुछ ऐसी,
रहूँ अगर मैं दूर तुम से,
तो मीत मिलाये ये तन्हाई ..(९)
तन्हाई क्या जाताना चाहती है,
क्यों प्यार का इम्तहान लेना चाहती है ..(१०)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 24 January 2016
यादें
"कह दो अपनी यादों से, अब से दिल के और करीब ना आये। दिल तो तेरी यादों के साथ धड़क जाता है पर हम दिल के बिना तड़प जाते हैं।''
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Tuesday, 12 January 2016
"आगाज ऐ जिन्दगी"
ये तो बस आगाज है मंजिल का,
अभी तो मेहनत का अंजाम बाकी है..(१)
अब तक तो बिखरा था मैं,
बस अब निखरना बाकी है..(२)
यूँ सराहा जो तूने इस नाचीज को हर कदम पर,
दिल तेरा गुलशन बन बैठा है..(३)
कभी थिरकते थे कदम मेरे,
अरमां जिन्दगी का गाने में..(४)
अब तो मैं हर नज्म गाता,
लोगों के मेहखाने में..(५)
बस इतनी सी आरजू है मेरी तुझसे (जिन्दगी),
मैं गाऊँ तुझे और तू सुने मुझे..(६)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
Sunday, 10 January 2016
''उनकी चाह में''
ये कल्ब उनका जहाँ हो गया...,
प्यार उनसे बे इन्तहा हो गया..(१)
संभाले अब सम्भलता नहीं...,
उनकी चाह में दिल और भी नादां हो गया..(२)
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
अजीब बात
ये भी अजीब बात है, मैं लिखता हूँ और वो मिटाती है। ऐसा क्या मेरे शब्दों में, जो वो मन ही मन मुस्कुराती है। -- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।
ऐ दिल
क्या करूँ मैं इस दिल का, जो मानता कम, मनाता ज्यादा है। क्यों सुनूं मैं तेरी ऐ दिल, तू सुनता कम, सुनाता ज्यादा है।
-- धीरेन्द्र सिंह बिष्ट।




