Monday, 14 August 2017
Sunday, 13 August 2017
Saturday, 12 August 2017
Friday, 11 August 2017
Tuesday, 8 August 2017
Monday, 7 August 2017
Sunday, 6 August 2017
Friday, 4 August 2017
Wednesday, 2 August 2017
Tuesday, 1 August 2017
Monday, 31 July 2017
Saturday, 29 July 2017
Friday, 28 July 2017
Wednesday, 26 July 2017
Monday, 24 July 2017
Sunday, 23 July 2017
Saturday, 22 July 2017
Friday, 21 July 2017
कर कोशिश मुसाफिर
कर कोशिश इस कदर मुसाफिर,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
दुनिया भले तुझे आज चाहे या ना चाहे,
क्यूँ ना नाम कल लोगों की ज़ुबान पर आए .!
सीख ले तालीम वक्त से,
शायद कल तुझे अपना बनाए .!
परवाह ठिकानों की छोड़कर,
क्यूँ ना सफ़र को जिंदगी मान ली जाए.!
बयान कर जिंदगी को इस कदर,
के पढ़ने वालों की ये मिसाल बन जाए.!
ग़म ज़रिया है जिंदगी का,
दूर कर अंधेरे जिंदगी के,
के उजाले में तेरा परचम लहराए .!
कर कोशिश इस कदर मुसाफिर,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
दुनिया भले तुझे आज चाहे या ना चाहे,
क्यूँ ना नाम कल लोगों की ज़ुबान पर आए .!
सीख ले तालीम वक्त से,
शायद कल तुझे अपना बनाए .!
परवाह ठिकानों की छोड़कर,
क्यूँ ना सफ़र को जिंदगी मान ली जाए.!
बयान कर जिंदगी को इस कदर,
के पढ़ने वालों की ये मिसाल बन जाए.!
ग़म ज़रिया है जिंदगी का,
क्यूँ न संग उनके, आगे बढ़ा जाए.!
के उजाले में तेरा परचम लहराए .!
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 19 July 2017
Saturday, 15 July 2017
जरिया ऐ जिंदगी
खुद को खुद से इस कदर तराशा.!
जिंदगी में कभी जीत की आशा तो कभी हार से निराशा.!
कभी खुद को लिख कर, कभी पढ़कर लिखा,
ख़्वाहिश को भूल कर हर पल मुश्किलों से लड़ा .!
रूठा था कल चन्द लम्हों से ,
पर आज ज़िंदगी चाहत बन गई.!
नफरत का दौर तो आज भी है,
पर जिंदगी में मोहब्बत एक दुआ सी बन गई.!
लिखना इबादत था,
और आज जरिया ऐ जिंदगी बन गई.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
जिंदगी में कभी जीत की आशा तो कभी हार से निराशा.!
कभी खुद को लिख कर, कभी पढ़कर लिखा,
ख़्वाहिश को भूल कर हर पल मुश्किलों से लड़ा .!
रूठा था कल चन्द लम्हों से ,
पर आज ज़िंदगी चाहत बन गई.!
नफरत का दौर तो आज भी है,
पर जिंदगी में मोहब्बत एक दुआ सी बन गई.!
लिखना इबादत था,
और आज जरिया ऐ जिंदगी बन गई.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
Friday, 14 July 2017
Thursday, 13 July 2017
Wednesday, 12 July 2017
लिबास मोहब्बत का
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 11 July 2017
Sunday, 9 July 2017
ज़िन्दगी
कभी शौक था लिखना लम्हों को,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
मन की किताब हर जगह खुलती नहीं ,
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Saturday, 8 July 2017
Friday, 7 July 2017
Wednesday, 5 July 2017
Tuesday, 4 July 2017
Monday, 3 July 2017
Sunday, 2 July 2017
Friday, 30 June 2017
Thursday, 29 June 2017
आईना मोहब्बत का
सँवार लेते हैं
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 28 June 2017
मोह्हबत के फरमान
आँखों में नमी,
पर होठों में मुस्कान,
शायद दिल ने सुना दिए
आज मोह्हबत के फरमान.!
-- धीर..,
Monday, 26 June 2017
Saturday, 24 June 2017
ऐसा क्या आज दिल में
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
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