Tuesday, 25 July 2017
Monday, 24 July 2017
Sunday, 23 July 2017
Saturday, 22 July 2017
Friday, 21 July 2017
कर कोशिश मुसाफिर
कर कोशिश इस कदर मुसाफिर,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
दुनिया भले तुझे आज चाहे या ना चाहे,
क्यूँ ना नाम कल लोगों की ज़ुबान पर आए .!
सीख ले तालीम वक्त से,
शायद कल तुझे अपना बनाए .!
परवाह ठिकानों की छोड़कर,
क्यूँ ना सफ़र को जिंदगी मान ली जाए.!
बयान कर जिंदगी को इस कदर,
के पढ़ने वालों की ये मिसाल बन जाए.!
ग़म ज़रिया है जिंदगी का,
दूर कर अंधेरे जिंदगी के,
के उजाले में तेरा परचम लहराए .!
कर कोशिश इस कदर मुसाफिर,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
दुनिया भले तुझे आज चाहे या ना चाहे,
क्यूँ ना नाम कल लोगों की ज़ुबान पर आए .!
सीख ले तालीम वक्त से,
शायद कल तुझे अपना बनाए .!
परवाह ठिकानों की छोड़कर,
क्यूँ ना सफ़र को जिंदगी मान ली जाए.!
बयान कर जिंदगी को इस कदर,
के पढ़ने वालों की ये मिसाल बन जाए.!
ग़म ज़रिया है जिंदगी का,
क्यूँ न संग उनके, आगे बढ़ा जाए.!
के उजाले में तेरा परचम लहराए .!
के हर मुश्किल आसान हो जाए.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 19 July 2017
Saturday, 15 July 2017
जरिया ऐ जिंदगी
खुद को खुद से इस कदर तराशा.!
जिंदगी में कभी जीत की आशा तो कभी हार से निराशा.!
कभी खुद को लिख कर, कभी पढ़कर लिखा,
ख़्वाहिश को भूल कर हर पल मुश्किलों से लड़ा .!
रूठा था कल चन्द लम्हों से ,
पर आज ज़िंदगी चाहत बन गई.!
नफरत का दौर तो आज भी है,
पर जिंदगी में मोहब्बत एक दुआ सी बन गई.!
लिखना इबादत था,
और आज जरिया ऐ जिंदगी बन गई.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
जिंदगी में कभी जीत की आशा तो कभी हार से निराशा.!
कभी खुद को लिख कर, कभी पढ़कर लिखा,
ख़्वाहिश को भूल कर हर पल मुश्किलों से लड़ा .!
रूठा था कल चन्द लम्हों से ,
पर आज ज़िंदगी चाहत बन गई.!
नफरत का दौर तो आज भी है,
पर जिंदगी में मोहब्बत एक दुआ सी बन गई.!
लिखना इबादत था,
और आज जरिया ऐ जिंदगी बन गई.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
Friday, 14 July 2017
Thursday, 13 July 2017
Wednesday, 12 July 2017
लिबास मोहब्बत का
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 11 July 2017
Sunday, 9 July 2017
ज़िन्दगी
कभी शौक था लिखना लम्हों को,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
मन की किताब हर जगह खुलती नहीं ,
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Saturday, 8 July 2017
Friday, 7 July 2017
Wednesday, 5 July 2017
Tuesday, 4 July 2017
Monday, 3 July 2017
Sunday, 2 July 2017
Friday, 30 June 2017
Thursday, 29 June 2017
आईना मोहब्बत का
सँवार लेते हैं
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 28 June 2017
मोह्हबत के फरमान
आँखों में नमी,
पर होठों में मुस्कान,
शायद दिल ने सुना दिए
आज मोह्हबत के फरमान.!
-- धीर..,
Monday, 26 June 2017
Saturday, 24 June 2017
ऐसा क्या आज दिल में
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Friday, 23 June 2017
Thursday, 22 June 2017
पहचान
पहचान भी अपने आप में बड़ी बात है,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 20 June 2017
Monday, 19 June 2017
Sunday, 18 June 2017
Saturday, 17 June 2017
Friday, 16 June 2017
तजुर्बा
इंसान पूरी ज़िन्दगी गलत हो सकता है,
पर तजुर्बा अक्सर ज़िन्दगी में सही होता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,Thursday, 15 June 2017
झिझक इंसान को अंदर से खोखली करती हैं,
ये आम बात है आज हर कोई एक अच्छी जिंदगी और अपने बेहतर भविष्य के बारे में सोचता है, कुछ सोचते ही रहते हैं और कुछ सोच को पूरा भी करते हैं| कुछ लोगों की सोच बड़ी होते हुये भी, लोग फिर भी पीछे रह जाते हैं, और किस्मत को दोष देते हैं|
एक बात आज प्राय सामने आती है, "झिझक" जो हमारे अंदर बसी है| कुछ लोगों के दिमाग़ में झिझक का प्रतिबिंब बना होता है, जिससे वह लोगों के बीच जाने में खुद को कमजोर समझते हैं, उनके मन में यही सोच अपना प्रभाव बनाती है, भीड़ में कैसे और लोगों में क्या बातें मुख्य होती हैं| यही से डर शुरू होता है, जो हमारे दिल को अंदर से कमजोर कर सीधा हमारे दिमाग़ पर असर करता है, जिससे कभी-कभार सब कुछ सही होने पर भी हम अपने लक्ष्य हासिल करते करते रह जाते हैं|
जब सोच हम पर प्रबल होती है, तभी कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, और कुछ रह जाते हैं| इसका मुख्य कारण सोच है, सोच की दिशा अगर सही है, तो हम अपने उद्देश्य को आसानी से हासिल करने में सफल होते हैं , किंतु जब सोच दिशा सही नही होती है ,तब सिवाय मायूसी कुछ हाथ नही आता|
जिंदगी में कोई मुकाम हासिल करना है तो, सबसे पहले दिमाग़ का संतुलित में होना आवश्यक है, अन्यथा हर संभव कार्य हमारे लिए असंभव भी है|
किसी चीज़ को सोच का हिस्सा उतना ही बनाए
जितना वह हमारे लिए उपयोगी हो..!!
-- धीर (धीरेन्द्र) .....,
Wednesday, 14 June 2017
Tuesday, 13 June 2017
Monday, 12 June 2017
Thursday, 8 June 2017
Wednesday, 7 June 2017
ऐ दिल
ना कर एहसास लम्हों को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!
ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!
थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!
तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!
ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!
ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!
थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!
तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!
ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 6 June 2017
Sunday, 4 June 2017
Saturday, 3 June 2017
Friday, 2 June 2017
Thursday, 1 June 2017
Wednesday, 31 May 2017
बेहतर कल
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
गर राह काँटों से भरी है,
तो पैरों में क्या देखना!
अगर धूप जिंदगी में खिली हो,
तो छाँव की क्या सोचना!
गर लक्ष्य खुद को ही पाना है,
तो सफ़र में, किसी का साथ क्या सोचना!
जैसा आज है मुसाफिर,
उससे बेहतर कल को सोचना!
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
तो घाव को क्या देखना!
गर राह काँटों से भरी है,
तो पैरों में क्या देखना!
अगर धूप जिंदगी में खिली हो,
तो छाँव की क्या सोचना!
गर लक्ष्य खुद को ही पाना है,
तो सफ़र में, किसी का साथ क्या सोचना!
जैसा आज है मुसाफिर,
उससे बेहतर कल को सोचना!
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 30 May 2017
आज और कल
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
क्यूँ आज की तुलना कल से करें,
क्यों ना आज को आज में ही रहने दिया जाए!
कल उनका है,
जो आज की कदर जानते हैं!
दौर उन्ही का है जहाँ में,
जो मुश्किलों में जिंदगी को तराशते हैं!
जी लिए दूसरों में जिंदगी अब तक,
क्यूँ ना आज खुद में खुद को जी जिया जाए!
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
क्यूँ आज की तुलना कल से करें,
क्यों ना आज को आज में ही रहने दिया जाए!
कल उनका है,
जो आज की कदर जानते हैं!
दौर उन्ही का है जहाँ में,
जो मुश्किलों में जिंदगी को तराशते हैं!
जी लिए दूसरों में जिंदगी अब तक,
क्यूँ ना आज खुद में खुद को जी जिया जाए!
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Sunday, 28 May 2017
Subscribe to:
Posts (Atom)

















































