Friday, 14 July 2017
Thursday, 13 July 2017
Wednesday, 12 July 2017
लिबास मोहब्बत का
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
तेरी ख़्वाहिश में डूबा मन,
अब रोज़ मुझ से उलझता है!
भूल जाऊँ अब खुद को,
ये दिल मुझ से तेरी बातें करता है.!
थाम लूँ हर लम्हा हर पल को मैं,
जो संग तेरे गुजरता है.!
निखार लूँ खुद को आज मैं,
तेरे इश्क़ में बिखर ने को जी करता है.!
ओढ़ लूँ लिबास तेरी मोहब्बत का,
आज तेरी पनाह में जीने को जी करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 11 July 2017
Sunday, 9 July 2017
ज़िन्दगी
कभी शौक था लिखना लम्हों को,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
आज यही ज़िन्दगी बन गया है.!
खो कर उसी को मिला है,
जिसने ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जिया है.!
मन की किताब हर जगह खुलती नहीं ,
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
बस इसे तलाश रहती है पढ़ने वालों की.!
गमों से उभर के तो देखो,
ज़िन्दगी तब तब हँसी है.!
जब जब उसके चेहरे पर
किसी ने दिल के बात पढ़ी है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Saturday, 8 July 2017
Friday, 7 July 2017
Wednesday, 5 July 2017
Tuesday, 4 July 2017
Monday, 3 July 2017
Sunday, 2 July 2017
Friday, 30 June 2017
Thursday, 29 June 2017
आईना मोहब्बत का
सँवार लेते हैं
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
खुद को अब तुम्हें देखकर!
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
खुद से ही
इश्क़ करने लगे हैं!
तुम आईना मेरी इबादत का हो!!
खो कर अब खुद को
तुझ में तलाशने लगे हैं!
तुम आईना मेरी चाहत का हो!!
आँखें हसीन ख़्वाब सजाती हैं,
पल-पल तुम्हें निहारने से,
तुम आईना मेरी रूह का हो!!
तेरे सपने भी दिल को,
बहार से लगते हैं,
तुम आईना मेरी मोहब्बत का हो!!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 28 June 2017
मोह्हबत के फरमान
आँखों में नमी,
पर होठों में मुस्कान,
शायद दिल ने सुना दिए
आज मोह्हबत के फरमान.!
-- धीर..,
Monday, 26 June 2017
Saturday, 24 June 2017
ऐसा क्या आज दिल में
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
क्यूँ भर लिए "तरकश" से शब्द मन ने,
जो आज खुद में खोने को जी नही करता!
ख्वाहिशों की पनाह में होकर,
फिर क्यूँ आज खुद से दूर रहने को जी सा करता!
तय कर ली भीड़ में मीलों तन्हाई,
फिर क्यूँ आज तन्हाई से डर सा लगता!
जीत लिया हर आस को मन से,
फिर क्यूँ आज हारने को दिल सा करता!
ऐसा क्या आज दिल में ,
जो खुद से बयां करने को जी नही करता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Friday, 23 June 2017
Thursday, 22 June 2017
पहचान
पहचान भी अपने आप में बड़ी बात है,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 20 June 2017
Monday, 19 June 2017
Sunday, 18 June 2017
Saturday, 17 June 2017
Friday, 16 June 2017
तजुर्बा
इंसान पूरी ज़िन्दगी गलत हो सकता है,
पर तजुर्बा अक्सर ज़िन्दगी में सही होता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,Thursday, 15 June 2017
झिझक इंसान को अंदर से खोखली करती हैं,
ये आम बात है आज हर कोई एक अच्छी जिंदगी और अपने बेहतर भविष्य के बारे में सोचता है, कुछ सोचते ही रहते हैं और कुछ सोच को पूरा भी करते हैं| कुछ लोगों की सोच बड़ी होते हुये भी, लोग फिर भी पीछे रह जाते हैं, और किस्मत को दोष देते हैं|
एक बात आज प्राय सामने आती है, "झिझक" जो हमारे अंदर बसी है| कुछ लोगों के दिमाग़ में झिझक का प्रतिबिंब बना होता है, जिससे वह लोगों के बीच जाने में खुद को कमजोर समझते हैं, उनके मन में यही सोच अपना प्रभाव बनाती है, भीड़ में कैसे और लोगों में क्या बातें मुख्य होती हैं| यही से डर शुरू होता है, जो हमारे दिल को अंदर से कमजोर कर सीधा हमारे दिमाग़ पर असर करता है, जिससे कभी-कभार सब कुछ सही होने पर भी हम अपने लक्ष्य हासिल करते करते रह जाते हैं|
जब सोच हम पर प्रबल होती है, तभी कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, और कुछ रह जाते हैं| इसका मुख्य कारण सोच है, सोच की दिशा अगर सही है, तो हम अपने उद्देश्य को आसानी से हासिल करने में सफल होते हैं , किंतु जब सोच दिशा सही नही होती है ,तब सिवाय मायूसी कुछ हाथ नही आता|
जिंदगी में कोई मुकाम हासिल करना है तो, सबसे पहले दिमाग़ का संतुलित में होना आवश्यक है, अन्यथा हर संभव कार्य हमारे लिए असंभव भी है|
किसी चीज़ को सोच का हिस्सा उतना ही बनाए
जितना वह हमारे लिए उपयोगी हो..!!
-- धीर (धीरेन्द्र) .....,
Wednesday, 14 June 2017
Tuesday, 13 June 2017
Monday, 12 June 2017
Thursday, 8 June 2017
Wednesday, 7 June 2017
ऐ दिल
ना कर एहसास लम्हों को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!
ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!
थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!
तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!
ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!
ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!
थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!
तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!
ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 6 June 2017
Sunday, 4 June 2017
Saturday, 3 June 2017
Friday, 2 June 2017
Thursday, 1 June 2017
Wednesday, 31 May 2017
बेहतर कल
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
गर राह काँटों से भरी है,
तो पैरों में क्या देखना!
अगर धूप जिंदगी में खिली हो,
तो छाँव की क्या सोचना!
गर लक्ष्य खुद को ही पाना है,
तो सफ़र में, किसी का साथ क्या सोचना!
जैसा आज है मुसाफिर,
उससे बेहतर कल को सोचना!
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
तो घाव को क्या देखना!
गर राह काँटों से भरी है,
तो पैरों में क्या देखना!
अगर धूप जिंदगी में खिली हो,
तो छाँव की क्या सोचना!
गर लक्ष्य खुद को ही पाना है,
तो सफ़र में, किसी का साथ क्या सोचना!
जैसा आज है मुसाफिर,
उससे बेहतर कल को सोचना!
गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Tuesday, 30 May 2017
आज और कल
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
क्यूँ आज की तुलना कल से करें,
क्यों ना आज को आज में ही रहने दिया जाए!
कल उनका है,
जो आज की कदर जानते हैं!
दौर उन्ही का है जहाँ में,
जो मुश्किलों में जिंदगी को तराशते हैं!
जी लिए दूसरों में जिंदगी अब तक,
क्यूँ ना आज खुद में खुद को जी जिया जाए!
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
क्यूँ आज की तुलना कल से करें,
क्यों ना आज को आज में ही रहने दिया जाए!
कल उनका है,
जो आज की कदर जानते हैं!
दौर उन्ही का है जहाँ में,
जो मुश्किलों में जिंदगी को तराशते हैं!
जी लिए दूसरों में जिंदगी अब तक,
क्यूँ ना आज खुद में खुद को जी जिया जाए!
यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Friday, 26 May 2017
Thursday, 25 May 2017
दस्तूर जिंदगी का
चुनौतियां कैसी भी हो,
उनको दस्तूर जिंदगी का समझ के स्वीकार लें!
नकारने वाले लोगों को,
समाज ज्यादा समय तक नहीं स्वीकारता!
जब तक आप में क्षमता है,
कोशिश तब तक करें!
कोशिश को देखकर
क्षमता अपने आप बढ़ने लगती है!
अनुभव एक मुसाफिर की तरह है,
जो जिंदगी भर हमारे साथ चलता है!
अगर मुश्किलों से हार भी गये आप,
पर खुद से कभी नही हारना!
खुद को जीतने वाला ही,
एक दिन दुनिया को जीतता है!
© धीर (धीरेन्द्र)..,
उनको दस्तूर जिंदगी का समझ के स्वीकार लें!
समाज ज्यादा समय तक नहीं स्वीकारता!
जब तक आप में क्षमता है,
कोशिश तब तक करें!
कोशिश को देखकर
क्षमता अपने आप बढ़ने लगती है!
सिर्फ़ जीत को लक्ष्य रखना ही जिंदगी नही है!
हार को स्वीकारना भी एक गुण है!
हार इतना सिखाती है जिंदगी में,
उतना जीत की चाह रखने वाले नही सीख पाते हैं!
जो जिंदगी भर हमारे साथ चलता है!
अगर मुश्किलों से हार भी गये आप,
पर खुद से कभी नही हारना!
एक दिन दुनिया को जीतता है!
© धीर (धीरेन्द्र)..,
Wednesday, 24 May 2017
Tuesday, 23 May 2017
नाम मोहब्बत में
कोई अब बदनाम कर लो हमें,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!
अब तो आकर थाम लो हमें,
तोड़ कर खुद को, तुझ से जोड़ लिया!
करीब से आकर अब जान लो हमें,
बरसों से दिलों ने दूरी को जिंदगी का दस्तूर ही मान लिया!
इस तन्हा को हमसफ़र बना के देख लो,
मुझे तो जिंदगी ने तन्हा मुसाफिर ही जान लिया!
कोई अब बदनाम कर लो हमें,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!
अब तो आकर थाम लो हमें,
तोड़ कर खुद को, तुझ से जोड़ लिया!
करीब से आकर अब जान लो हमें,
बरसों से दिलों ने दूरी को जिंदगी का दस्तूर ही मान लिया!
इस तन्हा को हमसफ़र बना के देख लो,
मुझे तो जिंदगी ने तन्हा मुसाफिर ही जान लिया!
कोई अब बदनाम कर लो हमें,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
Monday, 22 May 2017
Saturday, 20 May 2017
Thursday, 18 May 2017
शायद
भिगो ले खुद को बारिश में आज,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!
लिख ले फिर से खुद को आज,
शायद, कोई भुला बिसरा याद आए!
आजमा ले हुनर जिंदगी का मुसाफिर,
शायद, ये वक्त दो बार, ना आये!
मिटा ले दिलों की दूरियाँ अभी भी,
शायद, कोई रोज़ वो तुझ से बिछड़ जाये!
तराश ले खुद को आज में,
शायद, कल तुझे समझ पाए!
मिटा ले, गुमान दिल से,
शायद, कल तेरे और करीब आए!
जी ले जिंदगी आज में,
शायद, ये आज फिर ना आए!
भिगो ले खुद को बारिश में आज,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!
लिख ले फिर से खुद को आज,
शायद, कोई भुला बिसरा याद आए!
आजमा ले हुनर जिंदगी का मुसाफिर,
शायद, ये वक्त दो बार, ना आये!
मिटा ले दिलों की दूरियाँ अभी भी,
शायद, कोई रोज़ वो तुझ से बिछड़ जाये!
तराश ले खुद को आज में,
शायद, कल तुझे समझ पाए!
मिटा ले, गुमान दिल से,
शायद, कल तेरे और करीब आए!
जी ले जिंदगी आज में,
शायद, ये आज फिर ना आए!
भिगो ले खुद को बारिश में आज,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
Wednesday, 17 May 2017
खुद के करीब जिंदगी में
बदल जाती है अक्सर पल में जिंदगी,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!
मिट जाते हैं अक्सर फासले,
गर आप अपनी सोच के करीब रहो तो!
गम भी बहार ले आते हैं,
गर आप जिंदगी में खुश रहो तो!
मुश्किलें आसान हो जाती हैं,
अगर आप तरीके बदल लो जिंदगी में!
सफ़र भी कट जाता है अक्सर,
गर सपनों को हम सफ़र बना लो जिंदगी में!
बदल जाती है अक्सर पल में जिंदगी,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!
मिट जाते हैं अक्सर फासले,
गर आप अपनी सोच के करीब रहो तो!
गम भी बहार ले आते हैं,
गर आप जिंदगी में खुश रहो तो!
मुश्किलें आसान हो जाती हैं,
अगर आप तरीके बदल लो जिंदगी में!
सफ़र भी कट जाता है अक्सर,
गर सपनों को हम सफ़र बना लो जिंदगी में!
बदल जाती है अक्सर पल में जिंदगी,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
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