Saturday, 22 April 2017
Friday, 21 April 2017
Wednesday, 19 April 2017
Tuesday, 18 April 2017
"जी लूं हर दिन को नये सिरे से मैं"
अभी रात जिंदगी मे बाकि हैं!
कुछ हिसाब माँग लिए आज जिंदगी से,
कुछ और करने अभी बाकि हैं!
जिये हज़ार गम जिंदगी मे,
बस अब खुशियाँ ही बाकि हैं!
भीग लिए नफरत की बारिश मे,
छाँव प्यार की अभी बाकि है!
लिख लिए सफ़र के गीत,
अब ख़ुशियों मे गुनगुनाने बाकि है!
जी लूँ हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी जिंदगी मे रात बाकि हैं!
-- Dhirendra S. Bisht (Dhir)
Saturday, 15 April 2017
"छोटे-छोटे सपने"
अक्सर हर सपने के लिए बड़ी कोशिश की है मैने!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
Thursday, 13 April 2017
Wednesday, 12 April 2017
Sunday, 9 April 2017
खूबियाँ
लोगों में खामियाँ कम खूबियाँ ज्यादा नजर आने लगती हैं.!
-- "धीर"
Friday, 7 April 2017
एहसास गिर कर संभलने का
अगर कोई छोड़ भी दे परवाह मेरी,
पर मुश्किलों से जंग, जीत तक बरकरार रहेगी मेरी|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,
Thursday, 6 April 2017
Monday, 3 April 2017
Sunday, 2 April 2017
ज़िंदगी की बागडोर
तब से आज तक लोगों की कसर का जवाब नही|
कोई हौसले बढ़ाने तो कोई गिरने मे,
आज के जमाने का कोई हिसाब नही है|
असर हम पर भी इन बातों का कभी हुआ नहीं,
क्योंकि सपनों ने पहले से अपना जो बनना रखा है|
कौन नही मानता है?
लोग अनुभवी नही हैं आज समय मे |
बस ये तर्क और कुतर्क
कभी-कभार समझने वालों से उनकी समझ का इम्तिहान ले लेते हैं|
कोशिश तो खूब की आज के जमाने मे,
अक्सर भागीदारी उनकी रही है जिंदगी मे,
बिना परख जाने हम मे कमियाँ दिखाने की|
शिकायत हुई नहीं थी कल तलक किसी को जमाने मे,
फिर क्यूँ हुई "धीर" के आज को बेहतर बनाने मे|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,
Tuesday, 28 March 2017
Monday, 27 March 2017
Sunday, 26 March 2017
Saturday, 25 March 2017
Friday, 24 March 2017
Thursday, 23 March 2017
Wednesday, 22 March 2017
Monday, 20 March 2017
Sunday, 5 March 2017
उसूल दुनिया का
जिस किसी को भी करीब से जानने लगोगे तुम,
कम्बखत वही तुम्हारी समझ का लाख इम्तहान लेगा..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
नफरतों का गुब्बार
"ए मनचले आशिक",
पर हम आशियाना मोहब्बत का दिल में बना बैठे हैं..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर) _____,
प्यार से डर
दुश्मन मोहब्बत के ज्यादा और
नफरत करने वालों के अकसर कम होते हैं।''
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
आसुँओं कीमत
कैसे आसुँओं कीमत जान सकता है।
आंसू भी अपना हक़ अदा कर जाता है।
--" धीर''
मनचले आशिक
कही इन रंगों में,
मैं तेरा असल रंग ही ना भूल जाऊं..!!
-- "धीर"
तलाश ज्यादा है
जिंदगी से कम पर कोशिशों से उम्मीदें और ज्यादा है..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
असल जीने के मायने
तभी याद आते हैं असल जीने के मायने..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
आसान नहीं है लिखना
खुद को पहले कलम की स्याही में मिलाना पड़ता है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
Wednesday, 21 December 2016
थम जाती हैं मुश्किलें
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,
मुश्किलों में जीना बाकि है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
वक्त पर साथ निभाते है।
वैसे भीड़ में देखता उन्हें भी हूँ, जो वक्त पर बिन कहे साथ निभाते है।
-- धीर
कोशिशों से उम्मीदें
जिंदगी से कम पर कोशिशों से उम्मीदें और ज्यादा है..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
दुनिया का उसूल
जिस किसी को भी करीब से जानने लगोगे तुम,
कम्बखत वही तुम्हारी समझ का लाख इम्तहान लेगा..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)__,
Monday, 12 December 2016
आसुँओं कीमत
ए मनचले आशिक़
इतने रंग भी ना बदल ए मनचले आशिक,
कही इन रंगों में,
मैं तेरा असल रंग ही ना भूल जाऊं..!!
-- "धीर"
Tuesday, 6 December 2016
लिखना
इतना आसान भी नहीं है लिखना,
खुद को पहले कलम की स्याही में मिलाना पड़ता है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
Friday, 2 December 2016
ऐ जिन्दगी
अब और निखरना बाकी है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
अपना सफ़र
उन्हें देख कर,
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,
जिन्दगी का इतिहास
जो लोग अपनी सोच को, इरादों से बड़ी रखते हैं...!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)
Wednesday, 9 November 2016
चाहत
दुनिया भले ही ख्यालों में हो, पर मैं अपनी हकीकत से रूबरू हूँ।
ये पल मुश्किलों का ही सही, पर मैं अपनी चाहत के बहुत करीब हूँ।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 31 October 2016
Tuesday, 25 October 2016
बीते लम्हों
भुला नहीं आज भी बीते लम्हों को,
बस थोड़ा व्यस्त हूँ कल को बनाने में
- "धीरेन्द्र" (धीर)
Sunday, 9 October 2016
Wednesday, 5 October 2016
अफ़साना
जो मन कह रहा, अब वही सुन रहा हूँ।
बेसुध हूँ इस कदर,
जैसे मैं जिन्दगी का कोई अफ़साना लिख रहा हूँ।
-- ''धीर"
Wednesday, 28 September 2016
Monday, 26 September 2016
Wednesday, 7 September 2016
''Thinking and intentions''
Make a difficult job easier in life, then keep thinking always great intentions.
-- Dhirendra S. Bisht ( Dhir)
Monday, 29 August 2016
Tuesday, 23 August 2016
धुन
Wednesday, 10 August 2016
Tuesday, 9 August 2016
Wednesday, 22 June 2016
''साथ जिंदगी भर का"
''किसी का साथ जिंदगी भर का हो ना हो,
पर यादें अकसर जिंदगी भर का साथ निभाती हैं।"
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 20 June 2016
Saturday, 11 June 2016
"मुश्किलों का साथ''
कोई साथ हो ना हो, पर मुश्किलें साथ हैं।
"साथ लोगों को अक्सर कमजोर बनाता है,
पर मुश्किलें हर कदम पर हौसला बढ़ाती है।''
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 5 June 2016
Saturday, 28 May 2016
एक दिन जिन्दगी का
अगर सफर कर लो एक दिन जिंदगी का मुश्किल भरा,
तो ज़िन्दगी सालों तक खुशियाँ ले आती है मुफ़्त में।
-- ''धीरेंद्र" (धीर)
Friday, 27 May 2016
इंसानियत
पैसों से ज्यादा इंसानियत कमा के रखो!
वक्त बदलने पर पैसा नहीं, इंसानियत काम आती है।
-- "धीरेंद्र'' (धीर)
Monday, 23 May 2016
सफर सुहाना
जिन्दगी कोे ऐसे जाना,
जैसे कोई सफर था सुहाना।
कुछ रास्तों नेे इस कदर पहचाना,
लिखेगा ''धीर'' कोई अफ़साना।
उस कल में मैं यूँ खोया,
गोया सुर कोई, मेरे मन ने संजोया।
वो पागलपन था या जूनून,
ये तय कर पाना मुश्किल था।
बस यही चाहत थी मन।
कुछ कर दिखाऊँ।
हर हद से गुजर।
''ऐ जिन्दगी! बस तुझमें निखार लाऊँ।''
कोई हँसता, हालात पर मेरी,
और कोई देख तरसता, लगन को मेरी।
सपनो ने, दिन को रात
और रातों को दिन बनाया।
पाने की धुन में, हाय!
उस पल ने आँसूओं से मुँह धुलाया।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Wednesday, 18 May 2016
समय और साथ
कभी वक्त था, किसी अजनबी को अपना बनाने का। आज अजनबी अपना हुआ, पर समय नहीं है उनका साथ निभाने को। -- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Thursday, 12 May 2016
फूलों सी, ये "जिन्दगी'
फूलों सी ये जिन्दगी...(१)
हर पल कोशिशों के आगाज में,
खव्हिशों में डूबी जिन्दगी...(२)
मैं मुसाफिर मंजिल का
हर राह, चाह की एक नई किरण...(३)
पल पल नया एहसास है,
हर मुश्किल के बाद एक आस है...(४)
कोई पास तो कोई दूर,
कुछ मगरूर, तो कुछ मजबूर...(५)
दूर है मंजिल अभी,
पर मैं उसके के करीब हूँ...(६)
सीखे हुनर जिंदगी से मैने,
मैं बड़ा खुश नसीब हूँ...(७)
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Monday, 9 May 2016
''ख्वाहिशों में डूबी जिन्दगी''
कभी हंस लिया करते थे ,
और आज, रोना ही भूल गए हम।
कदम से कदम मिलाते थे,
जाने क्यों? चलना भूल गए हम।
जिन्दगी को समझना चाहते थे,
फिर कहाँ आ कर उलझ गए हम।
प्यार की बारिश में भीगा करते थे,
फिर क्यों नफरत की आग में झुलस गए हम।
ख्वाहिशों में डूबी थी जिन्दगी,
जाने क्यों भावनाओं में बह गए हम।
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 6 May 2016
Tuesday, 26 April 2016
''कुछ इस तरह जिन्दगी''
प्यार तो फूलों से था,
मगर काँटों ने हमें चुना..(१)
दोस्ती जहाँ से की,
मगर दुश्मन, जमाने ने हमको चुना..(२)
थोड़ा क्या हँस दिये हम,
लोगों ने (हँसी) हिसाब माँगना शुरू कर दिया..(३)
जितना सुलझते आये हम,
जिन्दगी ने उतना ही उलझना शुरू कर दिया..(४)
रश्म (दोस्ती) दिलों जां से निभाते आये,
बदले में आखों को बरसना पड़ा..(५)
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Sunday, 24 April 2016
खुद से जीतता, हारता
खुद ही से जीतता,
खुद ही से हारता।
मुश्किलों में मन,
मेरी उम्मीद को निहारता...
जाने आज का भी क्या इरादा है,
कोशिशों की कतार इस कदर कम
तो बुलंदियों को पाने की ज्यादा।
मुश्किलें भी हर पल
कितना कुछ जताती हैं।
आज बिखरना तो
कल मुझमें निखार लाती।
वक्त पर तो मेरा जोर नहीं,
बस खुद पर भरोसा है।
खुद ही से रूठता, खुद को मनाता।
गमजदा ये मन , जाने कितने अरमान सजाता।
आज को देखूँ तो,
अतीत याद आता है।
अतीत ही अक्सर मुझे बुंलदियों तक ले जाता है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)
Friday, 1 April 2016
हवा का झोंका
तूफान तो ना था वो...
शायद हवा का झोंका था।
जिसे जिन्दगी की डोर (प्यार)
समझ बैठा था।
शायद वो मेरे मन का धोखा था।
मंजिल का जरिया,
जिसे समझ बैठा था।
वो जिन्दगी का सबसे
उदासीन तोहफा था।
दिल तो ना टूटा,
पर मेरे अरमान जरूर टूटे।
बेपरवाह जज़्बात के आसूँ,
नम आँखों से फूटे।
मन में कभी हलचल करने वाला शहर,
अब वीरान सा लगने लगा।
धड़कनें शोरगुल शहर में खोकर,
एक नई दुनिया खोजने लगी।
जाने वो पल क्यों ऐसा,
कुछ अनसुलझी पहेली जैसा।
जिसे मैं उस रोज सुलझाता,
वो सुलझती और मैं उलझ जाता।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)



























