खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!
खाली था वर्षों से दिल,
बस बातों-बातों में भर आया!
नादान था अब तक,
पर आज जिंदगी ने जीना सिखाया!
भूल गया था खुद को,
गैरों के करम से, आज खुद को समझ पाया!
पथरा गई थी कई अरसे से आँखें,
आज भर आयी, तो खुद को, खुद के और करीब पाया!
खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!
-- धीर (धीरेन्द्र)
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