काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
नफ़रत से ज़्यादा प्यार को आजमाने वालों ने,
कभी मोहब्बत को जिंदगी का तोहफ़ा माना होता।
खुशी की चाह रखने वाले हर शख्स ने,
काश ग़म को जिंदगी का दस्तूर माना होता।
ज़िक्र मुश्किलों का छोड़ कर,
लोगों ने ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाना होता।
काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
नफ़रत से ज़्यादा प्यार को आजमाने वालों ने,
कभी मोहब्बत को जिंदगी का तोहफ़ा माना होता।
खुशी की चाह रखने वाले हर शख्स ने,
काश ग़म को जिंदगी का दस्तूर माना होता।
ज़िक्र मुश्किलों का छोड़ कर,
लोगों ने ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाना होता।
काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,
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