कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
तन्हा है जिंदगी इस कदर,
लोगों के साथ से कम तन्हाई से ज़्यादा मोहब्बत होने लगी है!
सोच उँची है जिंदगी में मेरी,
मगर मोहब्बत जिंदगी की गहराइयों से होने लगी है!
खामियाँ आज भी बहुत हैं मुझ में,
फिर भी आज खुद से मोहब्बत होने लगी है!
कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
तन्हा है जिंदगी इस कदर,
लोगों के साथ से कम तन्हाई से ज़्यादा मोहब्बत होने लगी है!
सोच उँची है जिंदगी में मेरी,
मगर मोहब्बत जिंदगी की गहराइयों से होने लगी है!
खामियाँ आज भी बहुत हैं मुझ में,
फिर भी आज खुद से मोहब्बत होने लगी है!
कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

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