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Wednesday, 3 May 2017

हमसफ़र

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!

नाराज़ नही था तुझसे मैं,
बस अब तलक ये दिल ही नादान था!

रूठा हूँ तुझसे अक्सर,
तुझे अपना मानकर!

जीना सिखाया, हर सफ़र में तूने,
हमसफ़र मुझे अपना मान कर!

तन्हाई ने तन्हा बनाया,
अक्सर मुझे पराया जान कर!

तूने (जिंदगी) आगोश में लिया,
मुझे अक्सर अपना मान कर!

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!
-- धीर (धीरेन्द्र) 


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