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Friday, 23 June 2017

रिश्ते घर जैसे

रिश्ते भी घर जैसे ही होते हैं,
बनाने में पूरी उमर बीत जाती है,
तोड़ने में पल भी नही लगता!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Thursday, 22 June 2017

पहचान

पहचान भी अपने आप में बड़ी बात है,
अगर लोगों के बीच बढ़ानी हो,
तो खुद में खोना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..., 

Tuesday, 20 June 2017

ये दिल

ये दिल भी अजीब सा है,
मुझ में रहता नहीं,
अब गैरों में जीने की बात करता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Monday, 19 June 2017

मुश्किलें

मुश्किलें हम से उतनी ही बड़ी होती है,
जितनी वो हमारी सोच पर हावी होती हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



Sunday, 18 June 2017

सबक

''अगर मुश्किलों को सबक बना लो जिंदगी में,
फिर तो ऊँचाई भी करीब सी लगती है उड़ने में।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 17 June 2017

बेपरवाह शख्स

''इश्क किया या गुनाह कर बैठे,
बेपरवाह शख्स पर ही बेवजह मोहब्बत लूटा बैठे!''
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Friday, 16 June 2017

तजुर्बा

इंसान पूरी ज़िन्दगी गलत हो सकता है,
पर तजुर्बा अक्सर ज़िन्दगी में सही होता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,

Thursday, 15 June 2017

झिझक इंसान को अंदर से खोखली करती हैं,


          ये आम बात है आज हर कोई एक अच्छी जिंदगी और अपने बेहतर भविष्य के बारे में सोचता है, कुछ सोचते ही रहते हैं और कुछ सोच को पूरा भी करते हैं| कुछ लोगों की सोच बड़ी होते हुये भी, लोग फिर भी पीछे रह जाते हैं, और किस्मत को दोष देते हैं|



          एक बात आज प्राय सामने आती है, "झिझक" जो हमारे अंदर बसी है| कुछ लोगों के दिमाग़ में झिझक का प्रतिबिंब बना होता है, जिससे वह लोगों के बीच जाने में खुद को कमजोर समझते हैं, उनके मन में यही सोच अपना प्रभाव बनाती है, भीड़ में कैसे और लोगों में क्या बातें मुख्य होती हैं| यही से डर शुरू होता है, जो हमारे दिल को अंदर से कमजोर कर सीधा हमारे दिमाग़ पर असर करता है, जिससे कभी-कभार सब कुछ सही होने पर भी हम अपने लक्ष्य हासिल करते करते रह जाते हैं|

          जब सोच हम पर प्रबल होती है, तभी कुछ लोग अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं, और कुछ रह जाते हैं| इसका मुख्य कारण सोच है, सोच की दिशा अगर सही है, तो हम अपने उद्देश्य को आसानी से हासिल करने में सफल होते हैं , किंतु जब सोच दिशा सही नही होती है ,तब सिवाय मायूसी कुछ हाथ नही आता|

          जिंदगी में कोई मुकाम हासिल करना है तो, सबसे पहले दिमाग़ का संतुलित में होना आवश्यक है, अन्यथा हर संभव कार्य हमारे लिए असंभव भी है|

किसी चीज़ को सोच का हिस्सा उतना ही बनाए
जितना वह हमारे लिए उपयोगी हो..!!
-- धीर (धीरेन्द्र) .....,

Wednesday, 14 June 2017

तलाश

ये तय है जिंदगी में "मुसाफिर"
"तलाश" हमसफ़र  की हो या मंज़िल की,
मिलना सिर्फ़ तुझे एक से है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Tuesday, 13 June 2017

Self-reflection

We are human
Negativeness will be just around us, because it's also a rule of nature!
Negativity is also a part of life,
if we used to use this part to live life,
then our thinking would be bigger one day!
-- Dhirendra (Dhir) S. Bisht


Monday, 12 June 2017

मंज़िल और तकदीर

मंज़िल उन्हें मिलती है,
जो घर से निकलते हैं!

राहों में अक्सर वही भटकते हैं,
जो अपनी तकदीर लिखते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 10 June 2017

सोच

इंसान उम्र से नहीं,
सोच से बड़ा होता है.!
-- धीर ...,

फिर से

ना याद आओ फिर से,
ये दिल फिर से गुस्ताख़ी करता है.!

ना लौट कर आना फिर से,
अब दिल मुझसे रूठने की बात करता है.!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



परिस्थिति

परिस्थितियां भले ही मुश्किल हो जीवन में,
पर इनसे पार पाने वाले ही
अक्सर जिंदगी को आसान बनाते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Thursday, 8 June 2017

सोच

ये जरूरी नहीं है,
जैसी सोच हम रखते हैं, वही दुनियाँ भी रखे,
पर ये तय है,
खुद को बदलने वाले ही अक्सर दुनिया की सोच बदलते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Wednesday, 7 June 2017

ऐ दिल

ना कर एहसास लम्हों को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!

ना ज़िक्र किया कर
लोगों में रह कर,
अब तुझ में खोकर
खुद को तलाशता हूँ!

ना जीत हर शख्स को
खुद से बेहतर,
जीत कर भी अब
खुद से हारता हूँ!

थम जा ज़रा,
ऐ दिल,
थम ने से तेरे एक पल
मानो! जिंदगी को सुकून सा मिलता है!

तोड़ कर चला जाता है,
हर शख्स,
मैं खुद में रह जाता हूँ
तुझ को जोड़ कर!

ना कर एहसास हर लम्हे को,
ऐ दिल!
अब डरने लगा हूँ,
हर नये एहसास से!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

Tuesday, 6 June 2017

सोच

जमाना आपके लिए क्या सोचता है,
ये जानना आपके लिये जरूरी नही है।
आप जमाने के लिये क्या सोच रखते हैं,
ये अपने आप में जानना जरूरी है।
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Sunday, 4 June 2017

ऊँचाई

कुछ चीजें जिंदगी में आसान नहीं होती,
गर सोच को खुद से जीत लो,
तो ऊँचाई को पैरों से नीचे होने में देर नही लगती है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Saturday, 3 June 2017

अतीत के सिलसिले

सिलसिले कुछ ऐसे हैं अतीत के,
मैं आज को जीना चाहता हूँ,
और ये भी कल की बात करते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Friday, 2 June 2017

इंतजार

ये इंतजार भी अजीब सा होता है,
लोग अपने आज को भूल जाते हैं !
कल के लिए!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


नज़रअंदाज़

नज़रों में सिर्फ़ उतना ही रहो,
जितना कोई आपको नज़रअंदाज़ ना कर सके!
 -- धीर (धीरेन्द्र)..,

Thursday, 1 June 2017

तख्त-ताज

राज तो दिलों पर मोहब्बत का होता है,
बे वजह लोग नफ़रत को तख्त-ताज समझ लेते हैं!

दिलों में आगाज़ तो सिर्फ़ मोहब्बत का होता है,
बे वजह लोग नफ़रत को अंजाम समझ लेते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Wednesday, 31 May 2017

बेहतर कल

गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!

गर राह काँटों से भरी है,
तो पैरों में क्या देखना!

अगर धूप जिंदगी में खिली हो,
तो छाँव की क्या सोचना!

गर लक्ष्य खुद को ही पाना है,
तो सफ़र में, किसी का साथ क्या सोचना!

जैसा आज है मुसाफिर,
उससे बेहतर कल को सोचना!

गर दर्द ही जिंदगी है,
तो घाव को क्या देखना!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

Tuesday, 30 May 2017

आज और कल

यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!

क्यूँ आज की तुलना कल से करें,
क्यों ना आज को आज में ही रहने दिया जाए!

कल उनका है,
जो आज की कदर जानते हैं!

दौर उन्ही का है जहाँ में,
जो मुश्किलों में जिंदगी को तराशते हैं!

जी लिए दूसरों में जिंदगी अब तक,
क्यूँ ना आज खुद में खुद को जी जिया जाए!

यही सोच कर आज को लिखता हूँ,
काश कोई खुद को पढ़ पाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,



Sunday, 28 May 2017

एक दिन

डर गया आज मुश्किलों से मैं,
मुझसे जुड़े लोगों का हौसला टूट जायेगा!
हार के ही जीतूंगा जिंदगी एक दिन,
सिर्फ एक दिन में बरसों जी कर दिखाऊँगा!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


कीमत

जितना खुद को लिखा,
उतना ही जिंदगी को पढ़ पाया!
कीमत अदा की हर खुशी की मैने,
पर लोगों ने खुशी से कम,
अक्सर मुझे कीमत से आज़माया!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Friday, 26 May 2017

व्यक्तित्व

हम क्या हैं, ये हमें समाज नहीं बताता,
हमारा व्यक्तित्व समाज को दर्शाता है!
-- धीर (धीरेन्द्र).., 



Thursday, 25 May 2017

दस्तूर जिंदगी का

चुनौतियां कैसी भी हो,
उनको दस्तूर जिंदगी का समझ के स्वीकार लें!

नकारने वाले लोगों को,
समाज ज्यादा समय तक नहीं स्वीकारता!

जब तक आप में क्षमता है,
कोशिश तब तक करें!

कोशिश को देखकर
क्षमता अपने आप बढ़ने लगती है!

सिर्फ़ जीत को लक्ष्य रखना ही जिंदगी नही है!
हार को स्वीकारना भी एक गुण है!

हार इतना सिखाती है जिंदगी में,
उतना जीत की चाह रखने वाले नही सीख पाते हैं!

अनुभव एक मुसाफिर की तरह है,
जो जिंदगी भर हमारे साथ चलता है!

अगर मुश्किलों से हार भी गये आप,
पर खुद से कभी नही हारना!

खुद को जीतने वाला ही,
एक दिन दुनिया को जीतता है!
© धीर (धीरेन्द्र)..,

Wednesday, 24 May 2017

आज और अतीत

जिसे देखो, आज को बदलने की चाह रखता है,
ज़रा आज में जी कर देख ले मुसाफिर,
जमाना अक्सर अतीत की बात करता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Tuesday, 23 May 2017

नाम मोहब्बत में

कोई अब बदनाम कर लो हमें,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!

अब तो आकर थाम लो हमें,
तोड़ कर खुद को, तुझ से जोड़ लिया!

करीब से आकर अब जान लो हमें,
बरसों से दिलों ने दूरी को जिंदगी का दस्तूर ही मान लिया!

इस तन्हा को हमसफ़र बना के देख लो,
मुझे तो जिंदगी ने तन्हा मुसाफिर ही जान लिया!

कोई अब बदनाम कर लो हमें,
मोहब्बत में हमने बहुत नाम कमा लिया!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


Monday, 22 May 2017

आँखों की नमी

ऐ अश्क़ ना बरस आज ही, क्या पता कल का?
हो ज़रूरत तेरी साथ की,
कही ये नमी आँखों को फिर से पत्थर ना बनाये!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,




सोच का स्तर

दोस्ती जमाने से रखो,
पर सीखो उन्ही लोगों से,
जिनकी सोच एक पैमाने की तरह हों.!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,

Saturday, 20 May 2017

वजह


जो दर्द से गुजरता है जिंदगी में,
वो ज़ख्म भले ही भूल जाए,
पर दर्द जख्मों की वजह कभी नही भूलता !
-- धीर (धीरेन्द्र)...,


Thursday, 18 May 2017

हालात

हालात इंसान को नहीं,
उसके सगे संबंधी उससे ज्यादा बुरा बनाते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,


अपना

तन्हाइयों में अक्सर लोग मुझे याद कर लेते हैं!
असल मायनों में वही अपना है जिंदगी में,
जो दुनियाँ की भीड़ में होकर भी,
अपनों को याद कर लेते हैं!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

शायद

भिगो ले खुद को बारिश में आज,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!

लिख ले फिर से खुद को आज,
शायद, कोई भुला बिसरा याद आए!

आजमा ले हुनर जिंदगी का मुसाफिर,
शायद, ये वक्त दो बार, ना आये!

मिटा ले दिलों की दूरियाँ अभी भी,
शायद, कोई रोज़ वो तुझ से बिछड़ जाये!

तराश ले खुद को आज में,
शायद, कल तुझे समझ पाए!

मिटा ले, गुमान दिल से,
शायद, कल तेरे और करीब आए!

जी ले जिंदगी आज में,
शायद, ये आज फिर ना आए!

भिगो ले खुद को बारिश में आज,
शायद, जिंदगी के पन्नों की स्याही धूल जाए!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,



Wednesday, 17 May 2017

खुद के करीब जिंदगी में

बदल जाती है अक्सर पल में जिंदगी,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!

मिट जाते हैं अक्सर फासले,
गर आप अपनी सोच के करीब रहो तो!

गम भी बहार ले आते हैं,
गर आप जिंदगी में खुश रहो तो!

मुश्किलें आसान हो जाती हैं,
अगर आप तरीके बदल लो जिंदगी में!

सफ़र भी कट जाता है अक्सर,
गर सपनों को हम सफ़र बना लो जिंदगी में!

बदल जाती है अक्सर पल में जिंदगी,
गर हर पल खुद के करीब रहो तो!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Monday, 15 May 2017

आज रोना आया

खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!

खाली था वर्षों से दिल,
बस बातों-बातों में भर आया!

नादान था अब तक,
पर आज जिंदगी ने जीना सिखाया!

भूल गया था खुद को,
गैरों के करम से, आज खुद को समझ पाया!

पथरा गई थी कई अरसे से आँखें,
आज भर आयी, तो खुद को, खुद के और करीब पाया!

खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Sunday, 14 May 2017

उड़ाने

मंज़िल की उड़ाने भी कुछ अजीब सी होती हैं,
अगर ऊँचा उड़ना हो जिंदगी में,
पहले कई गुना जिंदगी की गहराई से गुजरना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,








Saturday, 13 May 2017

मोहब्बत खुद से होने लगी

कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!

तन्हा है जिंदगी इस कदर,
लोगों के साथ से कम तन्हाई से ज़्यादा मोहब्बत होने लगी है!

सोच उँची है जिंदगी में मेरी,
मगर मोहब्बत जिंदगी की गहराइयों से होने लगी है!

खामियाँ आज भी बहुत हैं मुझ में,
फिर भी आज खुद से मोहब्बत होने लगी है!

कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,




Friday, 12 May 2017

दिल का हिस्सा

ज़माने ने हमेशा से मुझे दिल का हिस्सा बनाया,
मुझसे जुड़े हर शख्स ने अक्सर हर रिश्ते को मुझसे ज्यादा बखूबी निभाया।
बस फर्क इतना रहा,
किसी ने नफरत से तो किसी ने प्यार से हमें अब तक अपने दिल में बसाया।
-- धीर (धीरेन्द्र)


एहसास

उलझता वही है जो सुलझना जानता है।
मैं तो सिर्फ एहसास लिखता हूँ,
जमाना तो बस इसे अपनी समझ से पहचानता है।
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

Thursday, 11 May 2017

किरदार

दोस्ती तो दूर
दुश्मनी भी ईमानदारी से नहीं निभाते हैं लोग।
जहां से दिखे मतलब जिंदगी में,
अच्छा किरदार निभाते हैं आज लोग।
-- धीर (धीरेन्द्र) ...,

उम्मीद

उम्मीद खुद की बनो,
वो जिंदगी ही क्या,
जो किसी की आस में हो ,
इंसान अकसर खुद को भूल जाता है,
गैरों को याद करते करते।
-- धीर

सच

सच को समझने की नहीं
अपनाने की जरूरत है।
-- धीर (धीरेन्द्र)


Wednesday, 10 May 2017

आज

आज दीवार दिल की रंग दूँ ,
मन रंगों से खिल रहा है।

आज दूरियाँ दिल से मिटा दूँ,
मन मीलों तय कर रहा है।

आज हर ख्वाब को अपना बना लूँ,
मन दिल में हसीन पल संजो रहा है।

आज दिल को शायर बना लूँ,
मन खुद को गजल सा गुनगुना रहा है।

आज ख्वाहिशों से दिल सजा लूँ,
मन खुशी से झूम रहा है।

आज दीवार दिल की रंग दूँ ,
मन रंगों खिल रहा है।
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Monday, 8 May 2017

सपने से हक़ीकत का फ़ासला

सपने और हक़ीकत मे सिर्फ़ उतना ही फ़ासला होता है,
जितना सोच से हमारी वास्तविकता रूबरू होती है!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,




दिखावा जीवन

अगर जिंदगी में दिखावा ही जीवन होता,
तो जिंदगी जीने के लिए किसी मिसाल की जरूरत नही होती।
-- धीर (धीरेन्द्र)

Sunday, 7 May 2017

जिंदगी

दिल से समझ ले गर कोई दर्द किसी का,
घाव भी दर्द भूलकर जिंदगी जीने लगता है!

एक पल ग़म को भूल कर जी ले कोई,
जिंदगी का हर लम्हा हसीन लगने लगता है!

मुश्किलों से गर सबक ले कोई,
हार का अनुभव भी जीत से बढ़ कर लगने लगता है!

ख्वाहिशों को गर दिल में पनाह दे कोई,
तो मन भी दिल के साथ उसी की बात सुनने लगता है!

कोशिश तो करके देखो जिंदगी में,
मुसाफिर भी एक दिन मंज़िल की राह खुद से बनने लगता है!

आज में ज़रा कल को भी जी कर देखो,
जिंदगी का हर पल और भी हंसमुख सा लगने लगता है!

दिल से समझ ले गर कोई दर्द किसी का,
घाव भी दर्द भूलकर जिंदगी जीने लगता है!
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Saturday, 6 May 2017

काश

काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।

नफ़रत से ज़्यादा प्यार को आजमाने वालों ने,
कभी मोहब्बत को जिंदगी का तोहफ़ा माना होता।

खुशी की चाह रखने वाले हर शख्स ने,
काश ग़म को जिंदगी का दस्तूर माना होता।

ज़िक्र मुश्किलों का छोड़ कर,
लोगों ने ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाना होता।

काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Friday, 5 May 2017

ख़्वाहिश और एहसास

ख़्वाहिश और एहसास जिंदगी के दो अहम हिस्से हैं!
जब ख्वाहिशों की लहर मन मे उमड़ ने लगती है,

तब जिंदगी की हर मुश्किल
और भी आसान सी लगने लगती है!

जब लहरें उमड़ के ज़िंदगी के करीब आती हैं,
तब जिंदगी मे एहसास का सिलसिला शुरू होता है!

कभी कुछ खो कर कुछ पाने का,
तो कभी सब कुछ पाकर कुछ खो जाने का एहसास!

ख़्वाहिश ज़रूरी है जिंदगी मे,
ये इंसान को खुद से जीने का एहसास कराती है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,








Thursday, 4 May 2017

जाने क्यूँ

जल रहा हूँ हर रोज़ जिंदगी में,
जाने क्यूँ आज बुझा सा हूँ!

ख्वाहिशों के शहर में होकर आज,
क्यूँ खुद को अधूरा सा लग रहा हूँ!

जीत रहा हूँ हर ग़म ज़िंदगी के,
जाने क्यूँ खुद ही से हार रहा हूँ!

कोशिशों का सिलसिला वही है जिंदगी में,
जाने क्यूँ खुद में कमियाँ तलाश रहा हूँ!

आशाओं के बीच होकर आज,
जाने क्यूँ निराशा में डूब रहा हूँ!

जल रहा हूँ हर रोज़ जिंदगी में,
फिर क्यूँ आज बुझा सा हूँ!
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Wednesday, 3 May 2017

हमसफ़र

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!

नाराज़ नही था तुझसे मैं,
बस अब तलक ये दिल ही नादान था!

रूठा हूँ तुझसे अक्सर,
तुझे अपना मानकर!

जीना सिखाया, हर सफ़र में तूने,
हमसफ़र मुझे अपना मान कर!

तन्हाई ने तन्हा बनाया,
अक्सर मुझे पराया जान कर!

तूने (जिंदगी) आगोश में लिया,
मुझे अक्सर अपना मान कर!

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!
-- धीर (धीरेन्द्र) 


Tuesday, 2 May 2017

वीरों की शहादत को शत- शत नमन्

आँखें नम हैं,
धड़कने थम हैं,
सरहद पर जान लुटाने वाले
वीरों की शहादत को
मेरा शत- शत नमन् है!
-- धीर (धीरेन्द्र)


"एक सवाल खुशी से"

ग़म के जाने के बाद,
मैने खुशी से पूछा,
"तू पूरी जिंदगी मेरे साथ क्यूँ नही बीता सकती"?

खुशी मुस्कुरा कर बोली,
"जब तू एक जोड़ी कपड़ों में एक दिन नई गुज़ार सकता,
भला मैं तेरे संग कैसे सारी जिंदगी बीता सकती हूँ"!
-- - धीर (धीरेन्द्र)..,

एक कोशिश

जो उम्मीद अब आस ना रही हो,
उसे ग़म क्यूँ बनने दिया जाय!

गर मुसाफिर बनना है मंज़िल का,
क्यूँ ना परवाह किए बिना, मंज़िल तय की जाय!

जो दिन ढल गया जिंदगी में,
क्यूँ आज को उसमें जिया जाय!

डर को कमी बता कर,
क्यूँ समझौते जिंदगी से किए जाय!

हार को सबक बना कर,
क्यूँ ना लक्ष्य को आंक लिया जाय!

सोच में डूब ने से बेहतर,
आज एक और कोशिश की जाय!

हार कर अक्सर टूटते हैं लोग,
क्यूँ ना आज खुद को जोड़ लिया जाय!

जो उम्मीद अब आस ना रही हो,
उसे ग़म क्यूँ बनने दिया जाय!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



Monday, 1 May 2017

मुश्किल काम

कितना मुश्किल काम है
दुनिया में खुश रहना,
फिर भी सारे काम इसी से आसान होते हैं! 
-- धीर.., 


दिल गिटार सा

ये दिल भी एक गिटार सा है,
हर पल दिल में ख्वाहिशों की धुन छेड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

दिल डायरी सा

काश ये दिल भी डायरी सा होता,
इसे इस कदर बयां करता,
जब भी सफ़र जिंदगी का तन्हा होता,
मैं इसे अक्सर हम सफ़र चुनता!
-- धीर..,

भीड़ में तन्हा


भीड़ में जब भी तन्हा होता हूँ,
सही मायने में तभी अपना होता हूँ!
-- धीर..,