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Monday, 15 May 2017

आज रोना आया

खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!

खाली था वर्षों से दिल,
बस बातों-बातों में भर आया!

नादान था अब तक,
पर आज जिंदगी ने जीना सिखाया!

भूल गया था खुद को,
गैरों के करम से, आज खुद को समझ पाया!

पथरा गई थी कई अरसे से आँखें,
आज भर आयी, तो खुद को, खुद के और करीब पाया!

खुश हूँ आज,
चलो रोना आया!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Sunday, 14 May 2017

उड़ाने

मंज़िल की उड़ाने भी कुछ अजीब सी होती हैं,
अगर ऊँचा उड़ना हो जिंदगी में,
पहले कई गुना जिंदगी की गहराई से गुजरना पड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,








Saturday, 13 May 2017

मोहब्बत खुद से होने लगी

कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!

तन्हा है जिंदगी इस कदर,
लोगों के साथ से कम तन्हाई से ज़्यादा मोहब्बत होने लगी है!

सोच उँची है जिंदगी में मेरी,
मगर मोहब्बत जिंदगी की गहराइयों से होने लगी है!

खामियाँ आज भी बहुत हैं मुझ में,
फिर भी आज खुद से मोहब्बत होने लगी है!

कला खूब है तुम में कमियाँ तराश ने की,
हमे भी अब अच्छाइयों से नफ़रत सी होने लगी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)...,




Friday, 12 May 2017

दिल का हिस्सा

ज़माने ने हमेशा से मुझे दिल का हिस्सा बनाया,
मुझसे जुड़े हर शख्स ने अक्सर हर रिश्ते को मुझसे ज्यादा बखूबी निभाया।
बस फर्क इतना रहा,
किसी ने नफरत से तो किसी ने प्यार से हमें अब तक अपने दिल में बसाया।
-- धीर (धीरेन्द्र)


एहसास

उलझता वही है जो सुलझना जानता है।
मैं तो सिर्फ एहसास लिखता हूँ,
जमाना तो बस इसे अपनी समझ से पहचानता है।
-- धीर (धीरेन्द्र)...,

Thursday, 11 May 2017

किरदार

दोस्ती तो दूर
दुश्मनी भी ईमानदारी से नहीं निभाते हैं लोग।
जहां से दिखे मतलब जिंदगी में,
अच्छा किरदार निभाते हैं आज लोग।
-- धीर (धीरेन्द्र) ...,

उम्मीद

उम्मीद खुद की बनो,
वो जिंदगी ही क्या,
जो किसी की आस में हो ,
इंसान अकसर खुद को भूल जाता है,
गैरों को याद करते करते।
-- धीर

सच

सच को समझने की नहीं
अपनाने की जरूरत है।
-- धीर (धीरेन्द्र)


Wednesday, 10 May 2017

आज

आज दीवार दिल की रंग दूँ ,
मन रंगों से खिल रहा है।

आज दूरियाँ दिल से मिटा दूँ,
मन मीलों तय कर रहा है।

आज हर ख्वाब को अपना बना लूँ,
मन दिल में हसीन पल संजो रहा है।

आज दिल को शायर बना लूँ,
मन खुद को गजल सा गुनगुना रहा है।

आज ख्वाहिशों से दिल सजा लूँ,
मन खुशी से झूम रहा है।

आज दीवार दिल की रंग दूँ ,
मन रंगों खिल रहा है।
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Monday, 8 May 2017

सपने से हक़ीकत का फ़ासला

सपने और हक़ीकत मे सिर्फ़ उतना ही फ़ासला होता है,
जितना सोच से हमारी वास्तविकता रूबरू होती है!
-- धीर (धीरेन्द्र) ..,




दिखावा जीवन

अगर जिंदगी में दिखावा ही जीवन होता,
तो जिंदगी जीने के लिए किसी मिसाल की जरूरत नही होती।
-- धीर (धीरेन्द्र)

Sunday, 7 May 2017

जिंदगी

दिल से समझ ले गर कोई दर्द किसी का,
घाव भी दर्द भूलकर जिंदगी जीने लगता है!

एक पल ग़म को भूल कर जी ले कोई,
जिंदगी का हर लम्हा हसीन लगने लगता है!

मुश्किलों से गर सबक ले कोई,
हार का अनुभव भी जीत से बढ़ कर लगने लगता है!

ख्वाहिशों को गर दिल में पनाह दे कोई,
तो मन भी दिल के साथ उसी की बात सुनने लगता है!

कोशिश तो करके देखो जिंदगी में,
मुसाफिर भी एक दिन मंज़िल की राह खुद से बनने लगता है!

आज में ज़रा कल को भी जी कर देखो,
जिंदगी का हर पल और भी हंसमुख सा लगने लगता है!

दिल से समझ ले गर कोई दर्द किसी का,
घाव भी दर्द भूलकर जिंदगी जीने लगता है!
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Saturday, 6 May 2017

काश

काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।

नफ़रत से ज़्यादा प्यार को आजमाने वालों ने,
कभी मोहब्बत को जिंदगी का तोहफ़ा माना होता।

खुशी की चाह रखने वाले हर शख्स ने,
काश ग़म को जिंदगी का दस्तूर माना होता।

ज़िक्र मुश्किलों का छोड़ कर,
लोगों ने ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाना होता।

काश हमे जानने वालों ने,
कभी एक पल के लिए खुद को पहचाना होता।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Friday, 5 May 2017

ख़्वाहिश और एहसास

ख़्वाहिश और एहसास जिंदगी के दो अहम हिस्से हैं!
जब ख्वाहिशों की लहर मन मे उमड़ ने लगती है,

तब जिंदगी की हर मुश्किल
और भी आसान सी लगने लगती है!

जब लहरें उमड़ के ज़िंदगी के करीब आती हैं,
तब जिंदगी मे एहसास का सिलसिला शुरू होता है!

कभी कुछ खो कर कुछ पाने का,
तो कभी सब कुछ पाकर कुछ खो जाने का एहसास!

ख़्वाहिश ज़रूरी है जिंदगी मे,
ये इंसान को खुद से जीने का एहसास कराती है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,








Thursday, 4 May 2017

जाने क्यूँ

जल रहा हूँ हर रोज़ जिंदगी में,
जाने क्यूँ आज बुझा सा हूँ!

ख्वाहिशों के शहर में होकर आज,
क्यूँ खुद को अधूरा सा लग रहा हूँ!

जीत रहा हूँ हर ग़म ज़िंदगी के,
जाने क्यूँ खुद ही से हार रहा हूँ!

कोशिशों का सिलसिला वही है जिंदगी में,
जाने क्यूँ खुद में कमियाँ तलाश रहा हूँ!

आशाओं के बीच होकर आज,
जाने क्यूँ निराशा में डूब रहा हूँ!

जल रहा हूँ हर रोज़ जिंदगी में,
फिर क्यूँ आज बुझा सा हूँ!
-- धीर (धीरेन्द्र).., 

Wednesday, 3 May 2017

हमसफ़र

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!

नाराज़ नही था तुझसे मैं,
बस अब तलक ये दिल ही नादान था!

रूठा हूँ तुझसे अक्सर,
तुझे अपना मानकर!

जीना सिखाया, हर सफ़र में तूने,
हमसफ़र मुझे अपना मान कर!

तन्हाई ने तन्हा बनाया,
अक्सर मुझे पराया जान कर!

तूने (जिंदगी) आगोश में लिया,
मुझे अक्सर अपना मान कर!

जिया जिंदगी तुझे अब तक ,
खुद से खुद में तराश कर!
-- धीर (धीरेन्द्र) 


Tuesday, 2 May 2017

वीरों की शहादत को शत- शत नमन्

आँखें नम हैं,
धड़कने थम हैं,
सरहद पर जान लुटाने वाले
वीरों की शहादत को
मेरा शत- शत नमन् है!
-- धीर (धीरेन्द्र)


"एक सवाल खुशी से"

ग़म के जाने के बाद,
मैने खुशी से पूछा,
"तू पूरी जिंदगी मेरे साथ क्यूँ नही बीता सकती"?

खुशी मुस्कुरा कर बोली,
"जब तू एक जोड़ी कपड़ों में एक दिन नई गुज़ार सकता,
भला मैं तेरे संग कैसे सारी जिंदगी बीता सकती हूँ"!
-- - धीर (धीरेन्द्र)..,

एक कोशिश

जो उम्मीद अब आस ना रही हो,
उसे ग़म क्यूँ बनने दिया जाय!

गर मुसाफिर बनना है मंज़िल का,
क्यूँ ना परवाह किए बिना, मंज़िल तय की जाय!

जो दिन ढल गया जिंदगी में,
क्यूँ आज को उसमें जिया जाय!

डर को कमी बता कर,
क्यूँ समझौते जिंदगी से किए जाय!

हार को सबक बना कर,
क्यूँ ना लक्ष्य को आंक लिया जाय!

सोच में डूब ने से बेहतर,
आज एक और कोशिश की जाय!

हार कर अक्सर टूटते हैं लोग,
क्यूँ ना आज खुद को जोड़ लिया जाय!

जो उम्मीद अब आस ना रही हो,
उसे ग़म क्यूँ बनने दिया जाय!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,



Monday, 1 May 2017

मुश्किल काम

कितना मुश्किल काम है
दुनिया में खुश रहना,
फिर भी सारे काम इसी से आसान होते हैं! 
-- धीर.., 


दिल गिटार सा

ये दिल भी एक गिटार सा है,
हर पल दिल में ख्वाहिशों की धुन छेड़ता है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

दिल डायरी सा

काश ये दिल भी डायरी सा होता,
इसे इस कदर बयां करता,
जब भी सफ़र जिंदगी का तन्हा होता,
मैं इसे अक्सर हम सफ़र चुनता!
-- धीर..,

भीड़ में तन्हा


भीड़ में जब भी तन्हा होता हूँ,
सही मायने में तभी अपना होता हूँ!
-- धीर..,

Sunday, 30 April 2017

उनकी मोहब्बत में


उनकी मोहब्बत में इतना बदल गये,
क्या हम थे आज खुद ही भूल गये!
-- धीर..,

अधूरे ख्वाब

कुछ ख़्वाब आज पूरे हुए,
कुछ और अधूरे बाकी हैं!

जीने लगा हूँ जिंदगी को मैं,
पर जीत जिंदगी में अभी बाकी है!

कुछ ख्वाहिशें आज जगी हैं मन में,
कुछ ख्वाहिशों के शहर में जगाना बाकी हैं!

सफर तय किए हैं कई इस मुसाफिर ने,
पर अभी मुकाम जिंदगी में बाकी है!

इम्तिहान भले ही अधूरे हो जिंदगी में,
पर मुझ में हौसले अभी बाकी हैं!

कुछ ख़्वाब आज पूरे हुए,
कुछ और अधूरे बाकी हैं!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,


Saturday, 29 April 2017

कामयाबी

दूसरों की कामयाबी में अक्सर उन लोगों को शक होता है,
जिन्हें खुद पर भरोसा नही होता है।
-- धीर .., 

Friday, 28 April 2017

गुस्ताख़ी


इंसान तो बंट गये सरहदों में,
काश ये दिल भी बँट जाता!

ना गुस्ताख़ होती दिलों में
और ना ही दिल गुस्ताख़ी कर पाता!
-- धीर (धीरेन्द्र)

खुश हूँ आज,


खुश हूँ आज,
फिर भी रोना चाहता हूँ!

जीत लूँ दिल दुनिया का,
फिर भी खुद ही से हार जाता हूँ!

भूलना चाहूँ बीते लम्हों को,
दर्द फिर से उनको जिंदगी में दोहराता है!

मुश्किल भले आसान कर लूँ,
सबक जिंदगी में अक्सर जीना सिखाता है!

कल रहूँ ना रहूँ,
बस आज को आज में जीना चाहता हूँ!

खुश हूँ आज,
फिर भी रोना चाहता हूँ!
 -- धीर (धीरेन्द्र)






मुकाम

अब तक बिखरा था,
अब निखरना बाकी है!

ले भले लाख इम्तिहान ऐ जिंदगी,
अभी खुद को और संवरना बाकी है!

खामियां बहुत निकल चुकी मुझे में,
अब सिर्फ़ ख़ूबियाँ बाकी हैं!

खूब काट ली रात चाँद तारों संग मैंने,
अभी दिन के उजालों से रोशन होना बाकी है!

उम्मीद जो जुड़ी है जिंदगी से अब तक,
अब सिर्फ़ वो मुकाम मिलना बाकी है!

अब तक बिखरा था,
अब निखरना बाकी है!
-- धीर (धीरेन्द्र)



Thursday, 27 April 2017

दिल करता है

थक गया चल चल कर रोज़,
आज एक कदम रुकने को जी करता है!

रुक गया, कदम एक बिना सफर तय करे ,
निराशा मन को घेरने लगती है!

ऊब गया रोज़ एक सी जिंदगी जी कर,
आज कुछ अलग करने को दिल करता है!

सोच सोच कर, अक्सर मुकर गया मन,
अब कारवाँ करने को जी करता है!

जी गया मुश्किलों को अब तक,
अब आसान जिंदगी जीने का दिल करता है!

थक गया चल चल कर रोज़,
आज एक कदम रुकने को जी करता है!
-- धीरेन्द्र (धीर)...,






Wednesday, 26 April 2017

तन्हाई

कितनी खूब है ये तन्हाई,
हर आहट पर मेरी खामोशी बयान करती है!
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Monday, 24 April 2017

परख


परख सोच में नहीं इरादों मे रख मुसाफिर,
अक्सर कोशिशें तभी नाकाम होती हैं
जब मंज़िल सिर्फ सोच तक सीमित होती हैं।
-- धीर (धीरेन्द्र)..,

Sunday, 23 April 2017

वक्त

वक्त कभी गलत नहीं होता,
बस उसे समझने की नीति
कभी कभी ग़लत हो जाती है।
-- धीर (धीरेन्द्र)

Saturday, 22 April 2017

मोहब्बत का सिलसिला

अजीब सिलसिला है ये मोहब्बत का,
किसी के रूठने का जवाब नही, तो किसी के मनाने का हिसाब नही!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Friday, 21 April 2017

कमियाँ

कमियाँ मुझ मैं हैं,
फिर भी अपनी कमियाँ छोड़ जाते हैं,
मुझ में कमियाँ निकाल कर लोग!
-- धीर (धीरेन्द्र)

Wednesday, 19 April 2017

कोशिश एक पल खुद को हँसाने की

वजह मिलती कहाँ आज के बख़्त में मुस्कुराने की,
दिन भले ही मुश्किलों से भरा हो,
अक्सर कोशिश करता हूँ,
एक पल खुद को हँसाने की!!
-- धीर 

Tuesday, 18 April 2017

"मुश्किलें हमें बदल देती हैं"

हमारी उपलब्धियां हमें कम,
राह की मुश्किलें हमें ज्यादा बदल देती हैं!

-- धीर..,

"जी लूं हर दिन को नये सिरे से मैं"

जी लूं  हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी रात जिंदगी मे बाकि हैं!

कुछ हिसाब माँग लिए आज जिंदगी से,
कुछ और करने अभी बाकि हैं!

जिये हज़ार गम जिंदगी मे,
बस अब खुशियाँ ही बाकि हैं!

भीग लिए नफरत की बारिश मे,
छाँव प्यार की अभी बाकि है!

लिख लिए सफ़र के गीत,
अब ख़ुशियों मे गुनगुनाने बाकि है!

जी लूँ हर दिन को नये सिरे से मैं,
अभी जिंदगी मे रात बाकि हैं!
-- Dhirendra S. Bisht (Dhir)





Saturday, 15 April 2017

"छोटे-छोटे सपने"

जिंदगी में सपने भले ही छोटे-छोटे देखे,
अक्सर हर सपने के लिए बड़ी कोशिश की है मैने!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Thursday, 13 April 2017

हसरतें आज मन में

हसरतें कई हैं आज मन में,
पर तुमसे बढ़कर कोई नही!

जी लूँ जिंदगी निहार के तुम को,
तेरे ख़्वाब से बढ़कर कोई नही!

सवार लूँ खुद को आज तुमसे,
तेरे एहसास से बढ़कर कोई नही!

जो पल बीत गये संग तेरे,
इन लम्हों मे वो बात नही!

हसरतें कई हैं आज मन में,
पर तुमसे बढ़कर कोई नही!
-- धीरेन्द्र (धीर) ..,




Wednesday, 12 April 2017

बेपनाह इश्क़

क्यों ना करूँ बेपनाह इश्क़ उनसे,
मैं मोहब्बत उन से करती हूँ
और वो मेरी मोहब्बत से इश्क़ करते हैं!
-- धीरेन्द्र (धीर) ..,


Sunday, 9 April 2017

जीना हर कोई नहीं सिखाता

जीता हर कोई है,
पर जीना हर कोई नहीं सिखाता..!
-- धीरेन्द्र "धीर"
 

खूबियाँ

गर कमियां अपनी ही दूर कर ली जाय,
लोगों में खामियाँ कम खूबियाँ ज्यादा नजर आने लगती हैं.!
-- "धीर"

Friday, 7 April 2017

एहसास गिर कर संभलने का

एहसास है मुझे गिर कर संभलने का,
अगर कोई छोड़ भी दे परवाह मेरी,
पर मुश्किलों से जंग, जीत तक बरकरार रहेगी मेरी|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,


वक्त बदलता है मेरे नये अनुभव के साथ

कितना अजीब है ये वक्त,
खुद बदलता है मेरे नये अनुभव के साथ..!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Thursday, 6 April 2017

सोच

सोच हर इंसान की सही है,
अगर उसे समझने वाला सही हो.!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Tuesday, 4 April 2017

बातें

कभी कभी बातों से इंसान नहीं,
बातें इंसान की ज़िंदगी बदल देती है..!
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,


एहसास

एहसास दिलों में कम आज,
लोग इसे शब्दों मे ज्यादा पिरोना जानते हैं..!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Monday, 3 April 2017

दुआ

ऐ जिंदगी ना कोई और दुआ तुझ से,
बना काबिल इस कदर मुझे,
सिर्फ़ कोशिशों से जी लूँ तुझे|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,

Sunday, 2 April 2017

ज़िंदगी की बागडोर

ज़िंदगी की बागडोर जब से संभाली है,
तब से आज तक लोगों की कसर का जवाब नही|

कोई हौसले बढ़ाने तो कोई गिरने मे,
आज के जमाने का कोई हिसाब नही है|

असर हम पर भी इन बातों का कभी हुआ नहीं,
क्योंकि सपनों ने पहले से अपना जो बनना रखा है|

कौन नही मानता है?
लोग अनुभवी नही हैं आज समय मे |

बस ये तर्क और कुतर्क
कभी-कभार समझने वालों से उनकी समझ का इम्तिहान ले लेते  हैं|

कोशिश तो खूब की आज के जमाने मे,
अक्सर भागीदारी उनकी रही है जिंदगी मे,
बिना परख जाने हम मे कमियाँ दिखाने की|

शिकायत हुई नहीं थी कल तलक किसी को जमाने मे,
फिर क्यूँ हुई "धीर" के आज को बेहतर बनाने मे|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Tuesday, 28 March 2017

कदर

कदर किसी चीज़ की असल मे वही जान सकता हैं,
जिसने जिंदगी मे पाया कम और खोया ज़्यादा हो|
-- -- धीरेन्द्र (धीर)..,

जिंदगी को करीब से जाना है मैने

तरीके भले ही अलग हैं जिंदगी जीने के मेरे,
पर अक्सर इसे करीब से जाना है मैने..!
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Monday, 27 March 2017

"ख्वाबों के शहर मे"

एक ख्वाहिश उस रोज,
ख्वाबों के शहर मे|

ओस की बूँद की भांति
जा गिरी मन से ख्यालों के समंदर मे|

देख अचम्भा धीर,
कुछ पल के लिए|

मानो थम गया था वो दिन,
बस कुछ पल के लिए|

उस कल्पनाओं में था कुछ ऐसा,
मानो आशाओं के सावन में, उमंगों के बाहर जैसा|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,


Sunday, 26 March 2017

सोच

सोच से बड़ा कोई नही है,
सोच होते हुए भी लोग नीचे गिर जाते हैं |
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Saturday, 25 March 2017

जिंदगी के सबक

मैं अक्सर गलत होता हूँ,
पर जिंदगी के सबक मुझे मौके पर सही बना देते हैं|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Friday, 24 March 2017

कोशिशों का कारवाँ

कोशिशों का कारवाँ कुछ इस तरह "ज़िंदगी" मे,
मैं थक कर सोना चाहता हूँ, सपने फिर से जगा देते हैं|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Thursday, 23 March 2017

नया कल

वक्त से कदम मिलाकर,
जिंदगी से सीख रहा हूँ|
ख्वाहिशों के शहर मे आज,
नये कल को खोज रहा हूँ|

बिखर रहा हर रोज अब,
नये कल को निखारने में|
जाने क्यूँ बीत रहा ये पल एसे,
मानो सदियों लग रही हों इसे बिताने में|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Wednesday, 22 March 2017

चाहत

ज्यादा चाहत भी
इंसान को खुद का दुश्मन बना देती है।
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Monday, 20 March 2017

एहसास

मुश्किल है ये एहसास को समझ पाना,
लोगों ने कम, अक्सर मेरे दर्द ने मुझे जाना|
-- धीरेन्द्र (धीर)...,

"सबक ले मुश्किलों से"

सबक ले मुश्किलों से मुसाफिर,
आगाज मंजिल कठिन हो,
पर अंजाम ऐ जिंदगी खुशियों भरा होगा|
-- धीरेन्द्र (धीर)..,

Sunday, 5 March 2017

विश्वास की कहानी

विश्वास की कहानियाँ अक्सर सुनता आया हूँ,
पर किरदार आज तक नही देखा!
-- धीरेन्द्र (धीर)...,


उसूल दुनिया का

उसूल है दुनिया का,
जिस किसी को भी करीब से जानने लगोगे तुम,
कम्बखत वही तुम्हारी समझ का लाख इम्तहान लेगा..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

नफरतों का गुब्बार

चाहे भर ले नफरतों का गुब्बार
"ए मनचले आशिक",
पर हम आशियाना मोहब्बत का दिल में बना बैठे हैं..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर) _____,

प्यार से डर

''अब प्यार से भी डर लगने लगा हूँ,
दुश्मन मोहब्बत के ज्यादा और
नफरत करने वालों के अकसर कम होते हैं।''
-- "धीरेन्द्र'' (धीर)

आसुँओं कीमत

आँखों से भला कोई और
कैसे आसुँओं कीमत जान सकता है।
गम के हों या ख़ुशी पर,
आंसू भी अपना हक़ अदा कर जाता है।
--" धीर''

ख्याल

ज्यादा ख्याल भी
इंसान को एक दिन उसी का दुश्मन बना देता है..!!
-- "धीर"

मनचले आशिक

इतने रंग भी ना बदल ए मनचले आशिक,
कही इन रंगों में,
मैं तेरा असल रंग ही ना भूल जाऊं..!! 
-- "धीर"

तलाश ज्यादा है

ख्वाब कम अब तलाश ज्यादा है,
जिंदगी से कम पर कोशिशों से उम्मीदें और ज्यादा है..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

समझ

समय है तो कभी खुद को समझ कर देखो,
दूसरों को समझना तो बहुत आसान है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

लोग अल्फाज के आदि हैं

मैं तो बस एहसास लिखता हूँ,
और लोग तो अल्फाज के आदि हैं..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

असल जीने के मायने

जब दौड़ती है दरबदर जिंदगी,
तभी याद आते हैं असल जीने के मायने..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

जिंदगी को जीना सीखा

मैंने खुद को बदला नहीं,
अक्सर जिंदगी को जीना सीखा.!! 
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

आसान नहीं है लिखना

इतना आसान भी नहीं है लिखना,
खुद को पहले कलम की स्याही में मिलाना पड़ता है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

Wednesday, 21 December 2016

जीत का रास्ता

सोच को किसी का हमसफ़र नहीं,
मुसाफिर अपनी जीत का रास्ता बना 
दुनिया अक्सर तभी साथ होती है
जब उन्हें हमारे वक्त की जरुरत होती 
-- (धीर)


ख्याल इंसान का दुश्मन

ज्यादा ख्याल भी इंसान को एक दिन उसी का दुश्मन बना देता है..!
 -- "धीर"

थम जाती हैं मुश्किलें

थम जाती हैं अक्सर मुश्किलें उन्हें देख कर,
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,

बराबरी

किसी बराबरी उसकी सोच से नहीं,
छमता से करें..! -- "धीर"

सुन्दरता

सुन्दरता चेहरों में कम,
विचारों में ज्यादा सही लगती है..!!!
-- "धीर"

मुश्किलों में जीना बाकि है।

अब तक बिखरा था, अब और निखरना बाकी है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)

वक्त पर साथ निभाते है।

बस उन्ही से डरता हूँ, जो अपनापन जताते है।
वैसे भीड़ में देखता उन्हें भी हूँ, जो वक्त पर बिन कहे साथ निभाते है।
-- धीर

जीने के मायने

जब दौड़ती है दरबदर जिंदगी,
तभी याद आते हैं जीने के मायने..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

जिंदगी को जीना सीखा

मैंने खुद को बदला नहीं,
अक्सर जिंदगी को जीना सीखा है.!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

लोग तो अल्फाज

मैं तो बस एहसास लिखता हूँ,
और लोग तो अल्फाज के आदि हैं..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

कोशिशों से उम्मीदें

 ख्वाब कम अब तलाश ज्यादा है,
जिंदगी से कम पर कोशिशों से उम्मीदें और ज्यादा है..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

दुनिया का उसूल

उसूल है दुनिया का,
जिस किसी को भी करीब से जानने लगोगे तुम,
कम्बखत वही तुम्हारी समझ का लाख इम्तहान लेगा..!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)__,

दिलों की राजनीति

कभी राजनीति दलों के बीच हुआ करती थी,
पर आज दिलों के बीच आ गई..!
-- "धीर"

Monday, 12 December 2016

आसुँओं कीमत

आँखों से भला कोई और
कैसे आसुँओं की कीमत जान सकता है।

गम के हों या ख़ुशी पर,
आंसू भी अपना हक़ अदा कर जाता है।
--" धीर''

ख्याल

ज्यादा ख्याल भी
इंसान को एक दिन उसी का दुश्मन बना देता है..!!
-- "धीर"

ए मनचले आशिक़

इतने रंग भी ना बदल ए मनचले आशिक,
कही इन रंगों में,
मैं तेरा असल रंग ही ना भूल जाऊं..!!
-- "धीर"

Tuesday, 6 December 2016

लिखना

इतना आसान भी नहीं है लिखना,
खुद को पहले कलम की स्याही में मिलाना पड़ता है..!!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

Friday, 2 December 2016

ऐ जिन्दगी

अब तक बिखरा था,
अब और निखरना बाकी है।
इतने भी एहसान न कर ''ऐ जिन्दगी'',
अभी और मुश्किलों में जीना बाकि है।
-- ''धीरेन्द्र'' (धीर)

जरुरत

दुनिया तभी साथ होती है,
जब उसे आपके साथ की जरुरत होती है ..!
- "धीर"

अपना सफ़र

थम जाती हैं अक्सर मुश्किलें
उन्हें देख कर,
जो अपना सफ़र ख़ुद तय करना जानते हैं..!
- "धीरेन्द्र" (धीर)......,

जिन्दगी का इतिहास

अपनी जिंदगी का इतिहास वही लोग लिखते हैं,
जो लोग अपनी सोच को, इरादों से बड़ी रखते हैं...!
-- "धीरेन्द्र" (धीर)

बराबरी

किसी बराबरी उसकी सोच से नहीं,
छमता से करें..!
-- "धीर"

सुंदरता

सुन्दरता चेहरों में कम,
विचारों में ज्यादा सही लगती है..!!!
-- "धीर"