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Tuesday, 17 November 2015

"रोते हुये आया, रुलाकर जायेगा''

रोते हुये तू आया था,
और रुलाकर जायेगा।
कुछ पल नफरत से बिता लिये,
अब कुछ पल प्यार से निभा ले।
जिन्दगी का क्या है,
आज हँसा दे,
ना जाने कब रुला दे।
भ्रम को भुला कर,
हकीकत को अपना ले।

रोते हुये तू आया था,
और रुला कर जायेगा।
अपने लिये तो बहुत जी लिया,
अब नाम के लिये जी ले।
तारीफों के पुल से उतरकर,
जिन्दगी को हकीकत से जी ले।

रोते हुये तू आया था,
और रुला कर जायेगा।
चन्द पैसों पर अभिमान ना कर।
समय की बारिश में
मैल बनकर बह जायेगा पैसा।
जो बच भी गया
वो सब यही धरा रह जायेगा।
शोहरत प्यार की कमा ले
अपने साथ लेकर जायेगा।

रोते हुये तू आया था,
और रुला कर जायेगा।
अब तक जो किया,
उस भूल को भुला कर,
सभी को अपना कर,
हर दुःख में साथ निभा कर।
चलता चला चल।

जिस आज के गरूर में है तू
ये आज उस रेत की तरह है,
जो तेरी मुट्ठी से फिसल रही है।
खाली हाथ आया था,
और खाली हाथ जायेगा।
केवल तुझे सफेद चादर में
भेज दिया जायेगा।
रोते हुये तू आया था,
और रुला कर जायेगा।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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