इस बात की तू भूल ना कर।
लोगों से अपना उल्लू सीधा ना कर।
कोई ना जाने वक़्त के हेर।
कब मिला दे उसी से फेर।
दुनिया ये गोल है।
बस प्यार भरे दो बोल हैं।
किस भृम में तू डूबा है।
जो बीज आचरण के
लोगों में तू बोएगा।
उसी के फल तू पायेगा।
वक़्त का तुझे अहसास नहीं।
इस बात की तू भूल ना कर।
लोगों से अपना वैर ना कर।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
लोगों से अपना उल्लू सीधा ना कर।
कोई ना जाने वक़्त के हेर।
कब मिला दे उसी से फेर।
दुनिया ये गोल है।
बस प्यार भरे दो बोल हैं।
किस भृम में तू डूबा है।
जो बीज आचरण के
लोगों में तू बोएगा।
उसी के फल तू पायेगा।
वक़्त का तुझे अहसास नहीं।
इस बात की तू भूल ना कर।
लोगों से अपना वैर ना कर।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
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