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Thursday, 19 November 2015

''जिंदगी सीखती और सिखाती''

जिंदगी सीखती और सिखाती,
हर पल महकती और महकाती।
जिंदगी की कुछ कोशिशें नई,   
तो कुछ कोशिशें वही।       
मंज़िल भी वही,      
पर राह हैं कई।
मन की उम्मीदें अनेक,
पर उनको पाने की चाहत है एक।
जिंदगी का लक्ष्य एक,
पर जीवन की मुश्किलें अनेक।
जिंदगी सीखती और सिखाती,
हर पल महकती और महकाती।

जिंदगी हर पल,
कितना कुछ सिखाती है।
आज रूठना तो कल मनाती है।
कभी रेश्म सा धागा बुन,
प्यार से दिलों के फ़ासले मिटाती है।
कुछ हल्की से नोक झोक हो,
तो  नफ़रत का बीज बो कर
दो दिलों की नज़दीकियाँ बढ़ा कर,
प्यार भरा हक छिन जाती है।

प्यार से जियो तो
जिंदगी हसीन है।
कुछ पल मीठे,
तो कुछ पल नमकीन हैं।
दिलों मे प्यार भरा हो तो,
दुनियाँ रंगों से भरी है।
अगर हो नफ़रत दिल में यहाँ,
तो खूबसूरत दुनियाँ भी रंगहीन है।

कुछ पल खुशियों में झूमती,
कुछ पल गमों से झुजती।
एक नया एहसास बनकर,
अधूरी ख्वाहिश को पूरा कर,
जिंदगी सीखती और सिखाती।
हर पल महकती और महकाती।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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