सपनों में नहीं रहना मुझे,
हकीकतों में जीना है मुझे।
मेरी कोशिश ही,
मेरी जीत तय करेगी।
मेरी सोच मेरी कामयाबी की मिसाल बनेगी।
मेरी कामयाबी,
सभी को प्रेरित करेगी।
सपनों में नहीं रहना मुझे।
मुश्किलों से लड़ना है मुझे।
काँटों से फूलों को चुनना है मुझे।
जिन्दगी की दौड़ में,
हर मुसीबत से भिड़ना है मुझे।
परिणाम की परवाह छोड़ कर,
मंजिल की ओर बढ़ना है मुझे।
सपनो में नहीं रहना मुझे।
मैं अक्सर बन्द आँखों के
सपनों से डर कर बिखर जाता हूँ ,
सुहानी नींद से जागकर
अधूरी मंजिल को पाता हूँ।
बन्द आँखो के सपनों का क्या है,
मन को निराश बना जाते हैं।
जिन्दगी की दौड़ में,
मेरी उम्मीद को भटकाते हैं।
बिखर कर बनना
अच्छा लगता है।
किन्तु बनकर बिखरना,
बुरा लगता है।
इन सपनों में पड़कर
अक्सर बहुत कुछ खोया है मैने।
आँखों को आसूँ से
हर दिन भिगोया है मैने।
ख्यालों में खोकर,
सपने देखना छोड़ दिया मैने।
अपनी आने वाली मंजिल को,
नया मोड़ दिया है मैने।
रुक रुक कर,
सफर तय करना है मुझे।
हकीकतों में रहकर
मंजिल को पाना है मुझे।
सपनों में नहीं रहना है मुझे।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
हकीकतों में जीना है मुझे।
मेरी कोशिश ही,
मेरी जीत तय करेगी।
मेरी सोच मेरी कामयाबी की मिसाल बनेगी।
मेरी कामयाबी,
सभी को प्रेरित करेगी।
सपनों में नहीं रहना मुझे।
मुश्किलों से लड़ना है मुझे।
काँटों से फूलों को चुनना है मुझे।
जिन्दगी की दौड़ में,
हर मुसीबत से भिड़ना है मुझे।
परिणाम की परवाह छोड़ कर,
मंजिल की ओर बढ़ना है मुझे।
सपनो में नहीं रहना मुझे।
मैं अक्सर बन्द आँखों के
सपनों से डर कर बिखर जाता हूँ ,
सुहानी नींद से जागकर
अधूरी मंजिल को पाता हूँ।
बन्द आँखो के सपनों का क्या है,
मन को निराश बना जाते हैं।
जिन्दगी की दौड़ में,
मेरी उम्मीद को भटकाते हैं।
बिखर कर बनना
अच्छा लगता है।
किन्तु बनकर बिखरना,
बुरा लगता है।
इन सपनों में पड़कर
अक्सर बहुत कुछ खोया है मैने।
आँखों को आसूँ से
हर दिन भिगोया है मैने।
ख्यालों में खोकर,
सपने देखना छोड़ दिया मैने।
अपनी आने वाली मंजिल को,
नया मोड़ दिया है मैने।
रुक रुक कर,
सफर तय करना है मुझे।
हकीकतों में रहकर
मंजिल को पाना है मुझे।
सपनों में नहीं रहना है मुझे।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
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