हो साथ वो,
तो सपने भी अपने हो जाते हैं।
हो करीब वो तो,
हर पल को हसीन बना जाते हैं।
हो भूल कोई हमसे,
फिर भी अपनाते हैं।
हर जरूरतों पर मुझमें वो,
एक नई उम्मीद जगाते हैं।
हर कमी पर प्यार की बारिश कर
मुझे हर ख़ुशी का अहसास करा जाते हैं।
दोस्त मेरे हैं वो,
जो मेरी जिन्दगी को फूलों सा महकाते हैं।
हो साथ वो,
तो मुश्किल को आसां कर जाते हैं।
पाकर उनको ऐसा लगा जैसे,
दुनियाँ की हर ख़ुशी मेरे पास है।
रूठ भी जाऊँ उन से,
अपना समझ कर मना लेते हैं।
साथ बिताऊँ हर पल मैं उनके,
तो जिन्दगी को,
यादगार हिस्सा बना जाते हैं।
हो साथ वो,
तो जिन्दगी को महकाते हैं।
गम तो बहुत हैं,
ख़ुशियों का पता नहीं।
हैं साथ मेरे वो दोस्त,
मुश्किलों का दौर भी
आसान है।
दोस्त मेरे ऐसे,
जो हर को जीना सिखाते हैं।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
तो सपने भी अपने हो जाते हैं।
हो करीब वो तो,
हर पल को हसीन बना जाते हैं।
हो भूल कोई हमसे,
फिर भी अपनाते हैं।
हर जरूरतों पर मुझमें वो,
एक नई उम्मीद जगाते हैं।
हर कमी पर प्यार की बारिश कर
मुझे हर ख़ुशी का अहसास करा जाते हैं।
दोस्त मेरे हैं वो,
जो मेरी जिन्दगी को फूलों सा महकाते हैं।
हो साथ वो,
तो मुश्किल को आसां कर जाते हैं।
पाकर उनको ऐसा लगा जैसे,
दुनियाँ की हर ख़ुशी मेरे पास है।
रूठ भी जाऊँ उन से,
अपना समझ कर मना लेते हैं।
साथ बिताऊँ हर पल मैं उनके,
तो जिन्दगी को,
यादगार हिस्सा बना जाते हैं।
हो साथ वो,
तो जिन्दगी को महकाते हैं।
गम तो बहुत हैं,
ख़ुशियों का पता नहीं।
हैं साथ मेरे वो दोस्त,
मुश्किलों का दौर भी
आसान है।
दोस्त मेरे ऐसे,
जो हर को जीना सिखाते हैं।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
No comments:
Post a Comment