मन के गीत में
यूँ ही गुनगुनाता चला।
कोशिश के दीप मंजिल की
राहों में जलाता चला।
मन में आशा की
एक नई दुनिया बसाता चला।
मंजिल को पाने की लगन में,
यूँ मदमस्त चलता चला।
मानों मन की आशा को
पूरा करने का जुनून सा खिला।
कठिनाइयों ने रोका,
मुश्किलों ने टोका।
पर खुद को ना रोका,
बढ़ता चला।
मन के गीत में
यूँ ही गुनगुनाता चला।
मन में लगन की ज्योत
जलाता चला।
उम्मीद की किरण
अपने अंदर बसाता चला।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
यूँ ही गुनगुनाता चला।
कोशिश के दीप मंजिल की
राहों में जलाता चला।
मन में आशा की
एक नई दुनिया बसाता चला।
मंजिल को पाने की लगन में,
यूँ मदमस्त चलता चला।
मानों मन की आशा को
पूरा करने का जुनून सा खिला।
कठिनाइयों ने रोका,
मुश्किलों ने टोका।
पर खुद को ना रोका,
बढ़ता चला।
मन के गीत में
यूँ ही गुनगुनाता चला।
मन में लगन की ज्योत
जलाता चला।
उम्मीद की किरण
अपने अंदर बसाता चला।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
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