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Tuesday, 17 November 2015

"नारी समाज का दर्पण"

नारी समाज का दर्पण है।
हम सब इस पर अर्पण हैं।
भू से लेकर नभ तक,
कोई जगह अछुई नहीं।
 
हर जहाँ पे नारी ने आज,
अपनी जीत का परचम लहराया है।
इस युग को एक नई राह पे,
नारी ने चलना सीखाया है।
 
इस मंजिल को पाने में,
कई मशकत, कठिनायों में,
नारी को संघर्ष करना पड़ा।
नारी समाज की आशा है।
जीवन जीने की परिभाषा है।

 नारी समाज का दर्पण है।
 हम सब इस पर अर्पण हैं।
नारी सृजन एवं सबलता का अहसास है।
नारी श्रद्धा और दया वाश है।
अबला नहीं आज ये सशक्त है।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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