हार मान ना होना जिन्दगी।
दुखों में ना रोना जिन्दगी।
मुश्किलों में सबर ना खोना जिन्दगी।
अँधेरे में गुम ना होना जिन्दगी।
हार मान ना होना जिन्दगी।
कोशिश कर, हार ही
मंजिल की जीत तय करेगी।
दुःख के बादल अब छट ने लगे हैं।
सुख की घटा अब छाने लगी है।
मुश्किलें अब आसान होने लगी है।
मंजिल की राहें फिर से
नई दिखने लगी है।
हार मान ना होना जिन्दगी।
मायूसी का अँधेरा
अब छट ने लगा है।
मन की उम्मीदें अब बढ़ने लगी हैं।
आशा की किरणें
अब मन में उमड़ने लगी हैं।
मुश्किलों की डगर
अब आसान होने लगी हैं।
हार मान ना होना जिन्दगी।
सुख का क्या है,
इंसान को ऊँचाई के सपनों से
रूबरू कराती है।
अक्सर सुख पाने की चाहत,
इंसान को दुःख में
निराश बनाती है।
दुःख इंसान को मजबूत बनाता है,
जीवन की गहराइयों का
आभास कराता है।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
दुखों में ना रोना जिन्दगी।
मुश्किलों में सबर ना खोना जिन्दगी।
अँधेरे में गुम ना होना जिन्दगी।
हार मान ना होना जिन्दगी।
कोशिश कर, हार ही
मंजिल की जीत तय करेगी।
दुःख के बादल अब छट ने लगे हैं।
सुख की घटा अब छाने लगी है।
मुश्किलें अब आसान होने लगी है।
मंजिल की राहें फिर से
नई दिखने लगी है।
हार मान ना होना जिन्दगी।
मायूसी का अँधेरा
अब छट ने लगा है।
मन की उम्मीदें अब बढ़ने लगी हैं।
आशा की किरणें
अब मन में उमड़ने लगी हैं।
मुश्किलों की डगर
अब आसान होने लगी हैं।
हार मान ना होना जिन्दगी।
सुख का क्या है,
इंसान को ऊँचाई के सपनों से
रूबरू कराती है।
अक्सर सुख पाने की चाहत,
इंसान को दुःख में
निराश बनाती है।
दुःख इंसान को मजबूत बनाता है,
जीवन की गहराइयों का
आभास कराता है।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
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