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Tuesday, 17 November 2015

"शब्दों के बीज"

पुरानी कहावतों में सच्चाई
और गहराई नजर आती है।
फिर क्यों आधुनिक लोगों की बातों में
केवल चतुराई नजर आती है।

नाम के लिए जीया करते थे वो लोग।
फिर क्यों नाम डुबाने के लिए जी रहे हैं,
आधुनिक युग के कुछ लोग।
हर सुख दुःख में संयम और सुकून था उन्हें।
पर आज दुःख में संयम खो कर,
सुख में क्यों इतराते है लोग।

आपस में सदभावना का पाठ पढ़ा कर,
लोगों को एक बन्धन में
लाना चाहते थे वो लोग।
फिर क्यों आज आपस में
दुर्व्यवहार कर,
लोगों में फूट दिलाते हैं कुछ लोग।

शब्दों की बोली से
फूल बरसाते थे वो लोग।
फिर क्यों आज शब्दों के बोल से
लोगों के मन को आहत पहुँचाते हैं कुछ लोग।

जीवन में अच्छी प्रेरणा देकर,
मन में आशा के बीज बोते थे वो लोग।
फिर क्यों आज जातिवाद की भावना जगा कर,
आपस में नफरत के बीज बोते हैं कुछ लोग।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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