मै नमन करूँ,
मै नमन करूँ।
शीश झुका कर,
मै नमन करूँ ।
माँ सरस्वती तुम्हारा वंदन करूँ।
हे वीणा वादनी,
हे ज्ञान दायनी।
माँ तेरा मै अभिन्दन करूँ।
मै नमन करूँ,
मै…………..,
दे ज्ञान का वो वरदान मुझे,
छा जाऊँ समूचे विश्व में।
सद् बुद्धि दे,
सद् मार्ग दे।
माँ मेरा कल्याण कर,
बेटे का जीवन सवार दे।
नमन करूँ मै,
मै………….,
भाग्य बनाऊँ सत कर्म से,
इच्छा फल पाऊँ,
अपनी लगन से।
ऐसा माँ सामर्थ्य दे।
नमन करू मै,
नमन करूँ।
पुष्प अर्पण कर,
माँ तेरी मै वन्दना करूँ।।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
(29.09.2015/5:45 am)

No comments:
Post a Comment