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Tuesday, 17 November 2015

"माँ प्यार का सागर"



















माँ प्यार का सागर है।
माँ सुख की गागर है।
माँ प्यार की मूरत है।
माँ दया की सूरत है।

माँ एक कंचन काया।
माँ हमारे जीवन की छाया है।
माँ एक इबादत है।
माँ बचपन की आदत है।
माँ शब्द बड़ा अजूबा है।
इसके जैसा न कोई दूजा है।

कोटि कोटि नमन तुझे है माँ,
जो तूने मुझे अपना रूप दिया।
दुनिया में आने का एक प्रारूप दिया।
माँ मान तेरा बढ़ाऊंगा,
हर वो कोशिश करता जाऊँगा।
माँ प्यार का सागर है।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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