मन की लालसा ने मुझे पुकारा।
छू ले गगन, बन एक तारा।
रोशन कर दे इस जग को तू।
बन सबकी उम्मीदों का सितारा।
अरमान तो दिल में बहुत हैं, तेरे।
पर ये है मंजिल का नया इशारा।
मन की लालसा ने मुझे पुकारा।
बन जगत का तारा।
हार मान ना होना तू।
बनना है तुझे, सबका सहारा।
किया सफर, जो राहों में तू ने।
वो मंजिल की डगर अब दूर नहीं।
जलाता जा यूँ दीपक आशाओं के मन में।
मंजिल से अब तू दूर नहीं।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
छू ले गगन, बन एक तारा।
रोशन कर दे इस जग को तू।
बन सबकी उम्मीदों का सितारा।
अरमान तो दिल में बहुत हैं, तेरे।
पर ये है मंजिल का नया इशारा।
मन की लालसा ने मुझे पुकारा।
बन जगत का तारा।
हार मान ना होना तू।
बनना है तुझे, सबका सहारा।
किया सफर, जो राहों में तू ने।
वो मंजिल की डगर अब दूर नहीं।
जलाता जा यूँ दीपक आशाओं के मन में।
मंजिल से अब तू दूर नहीं।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
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