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Tuesday, 17 November 2015

"देव भूमि उत्तराखण्ड"

ये देव भूमि मेरी,
ये पावन भूमि मेरी।
ये जन्म भूमि मेरी,
ये कर्म भूमि मेरी।

हिमालय की तलहटी पर बसी,
नदियों के संगम से बनी।
एक तरफ गंगा तो दूजी तरफ यमुना,
अपने शीतल जल से करते सबको निर्मल यहाँ।
ये देवों की भूमि मेरी,
ये सुंदर भूमि मेरी।

है मसूरी पर्वतों की रानी,
जिसकी ठंडी हवायें सुनाती
सबको इसकी सुंदर कहानी।
बर्फ का आंचल ओढ़ कर,
पर्यटकों का मन मोहकर,
दिलों मे दस्तक देती है सुहानी।
ये उत्तराखंड भूमि मेरी,
ये पर्यटन भूमि मेरी।

शांति और रोमांच के
मधुर मधुर जो गीत सुनाता,
हर इक मोड़ पे देखो अनोखी
प्रकृति की छटा दिखाता।
योग राजधानी के रूप में ऋषिकेश
दुनिया में जाना जाता।
ये देव भूमि मेरी,
ये सुंदर भूमि मेरी।

प्रभु हरी के नाम पर,
है बसा हरिद्वार यहाँ पर।
है केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी,
इन तीर्थों के साथ यहाँ पर।
पूरी हो जाती है सबकी
मनोकामना आकर यहाँ पर।
ये देवों की भूमि मेरी,
ये पावन भूमि मेरी।

प्रभु विराजे खुद आकर जहाँ पर,
धन्य हूँ जो मैं जन्मा यहाँ पर।
देवों ने बनाई, अनेक तीर्थों से सजाई,
ये उत्तराखंड भूमि मेरी।
ये सुंदर भूमि मेरी,
ये पावन भूमि मेरी।
ये देव भूमि मेरी।
© धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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